हल्द्वानी: देश के जाने-माने व्लॉगर सौरव जोशी इन दिनों अपनी करोड़ों रुपये की लक्ज़री कार में आ रही तकनीकी किल्लत को लेकर बेहद परेशान हैं। उनके हालिया वीडियो ब्लॉग 'Race With Brothers. Kon Jeetega?' ने इंटरनेट पर गाड़ियों के ईंधन की क्वालिटी को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। 41 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स वाले सौरव ने लाइव कैमरे पर अपनी मर्सिडीज-बेंज एसयूवी के डैशबोर्ड आंकड़े दिखाते हुए यह दावा किया कि उनकी गाड़ी का माइलेज अप्रत्याशित रूप से बेहद कम हो चुका है। उन्होंने इस खराबी के लिए सीधे तौर पर देश में मिलने वाले एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (Ethanol-Blended Petrol) को जिम्मेदार ठहराया है।
सिर्फ 48 घंटे में 17 से घटकर 5 पर पहुंचा माइलेज
उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के निवासी सौरव जोशी ने अपने व्लॉग में साझा किया कि मात्र दो दिनों के भीतर उनकी इस लक्ज़री जर्मन गाड़ी का माइलेज बुरी तरह धराशायी हो गया। जो कार पहले प्रति लीटर 17 किलोमीटर का माइलेज दे रही थी, वह अचानक घटकर 9 पर आ गई। परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई, अगले ही दिन डैशबोर्ड पर यह आंकड़ा गिरकर केवल 5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया। सौरव ने इसके लिए स्थानीय पेट्रोल पंपों से मिलने वाले तेल को कसूरवार माना। उनकी पत्नी और को-व्लॉगर अवंतिका भट्ट ने भी इस पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी महंगी कार पर भारी रकम खर्च करने के बाद यह नतीजा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले फुल टैंक कराने पर गाड़ी 800 किलोमीटर की रेंज दिखाती थी, जो अब रीफिल के बाद महज 480 किलोमीटर ही दर्शा रही है। उन्हें डर है कि इस वजह से कार का पेट्रोल इंजन पूरी तरह क्षतिग्रस्त न हो जाए।
छोटे शहरों में लक्ज़री कार मालिकों की बढ़ी चिंता
सौरव ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास मर्सिडीज की एक इलेक्ट्रिक एसयूवी भी है, इसलिए उसमें एथेनॉल को लेकर कोई समस्या नहीं है। लेकिन इस पेट्रोल वेरिएंट को लेकर हमेशा डर बना रहता है। सौरव का मानना है कि हल्द्वानी जैसे छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए प्रीमियम गाड़ियों का खराब होना बड़ी आफत है, क्योंकि कोई भी मैकेनिकल खराबी आने पर इन्हें सुधारने के लिए सीधे दिल्ली भेजना पड़ता है।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के सीईओ ने मिलावट की ओर किया इशारा
इस पूरे विवाद पर मर्सिडीज-बेंज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ संतोष अय्यर का बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई ग्राहक इस संबंध में डीलरशिप से संपर्क कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि कंपनी द्वारा वर्ष 2020 के बाद बेची गई सभी गाड़ियां एथेनॉल मिश्रण (E20) को सहने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। अय्यर ने असली समस्या पेट्रोल पंपों पर होने वाली अवैध मिलावट को बताया, जिसके कारण वाहनों के इंजन पर बुरा असर पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावों को बताया 'भ्रामक नैरेटिव'
दूसरी तरफ, भारत सरकार प्रदूषण नियंत्रण और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए देशभर में 20 फीसदी एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) के नियम को तेजी से लागू कर रही है। सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने और जंग लगने के दावों को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन बातों को 'सोची-समझी झूठी कहानी' (गलत नैरेटिव) करार दिया। गडकरी ने चुनौती देते हुए कहा कि E20 पेट्रोल के कारण कार खराब होने का अब तक एक भी प्रामाणिक मामला सामने नहीं आया है और सोशल मीडिया पर केवल अफवाहें फैलाई जा रही हैं।