नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्द बोलने की आरोपी छात्रा रुचिका सिंह का माफीनामा वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में 15 साल की बताई जा रही रुचिका हाथ जोड़कर माफी मांगती नजर आ रही हैं. वायरल वीडियो में रुचिका कहती हैं कि वह कनॉट प्लेस घूमने के बाद दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थीं. वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर उन्होंने ऐसी बातें कहीं, जो माफी के लायक नहीं थीं.
लो हो गया इसका भी guys ????
— Satya ???? (@SSati8193029) August 1, 2026
मैं सिर्फ 15 साल की हूं, मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं ????
- रूचिका सिंह????
स्टूडेन्ट प्रोटेस्ट में प्रधानमंत्री को गंदी गालियां देने वाली लड़की???? pic.twitter.com/Y3qVgtHJIi
उन्होंने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए कहा कि मुझसे बड़ी गलती हुई है, मुझे खुद पर शर्म आ रही है. पूरे देश से माफी मांगती हूं. ग्लोबल भारत टीवी वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है. यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के कुछ घंटों बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान उन्हें गाली देने वाले छात्रों को माफ कर दिया है. मोदी ने कहा था कि उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्द उन्हें परेशान करने वाले थे, लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए.
इससे पहले 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी. आरोप है कि उन्होंने पीएम के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई और जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की. मामला भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज किया गया, जिसे बाद में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने भेज दिया गया.
जानकारी के अनुसार रुचिका अपनी मां के साथ नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थीं. फिलहाल उनका फ्लैट बंद है और सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक वह प्रदर्शन के बाद से वापस नहीं लौटी हैं. पुलिस सोसाइटी पहुंचकर स्थानीय लोगों से पूछताछ भी कर चुकी है. प्रदर्शन आयोजित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने इस एफआईआर पर आपत्ति जताई है.
पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी बातों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से बोलने की आजादी पर बुरा असर पड़ सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि पीड़ित पक्ष को मानहानि का मामला दर्ज कराना चाहिए, न कि आपराधिक कार्रवाई का रास्ता अपनाना चाहिए.