जमानत देते-देते जज साहब ने ऐसा क्या कह दिया कि केजरीवाल की रातों की नींद बाहर आकर भी...

Global Bharat 10 May 2024 08:11: PM 2 Mins
जमानत देते-देते जज साहब ने ऐसा क्या कह दिया कि केजरीवाल की रातों की नींद बाहर आकर भी...

जिस वक्त आम आदमी पार्टी के नेता कार्यालय में लड्डू बांट रहे थे, उसी वक्त पीएमओ के एक अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कॉल किया, जज के फैसले में एक शब्द ऐसा है, जो साफ इशारा करता है कि ये जीत केजरीवाल की नहीं बल्कि बीजेपी की है. शायद उस शब्द का मतलब 99 फीसदी लोग न समझ पाए हों, पर जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अपने फैसले में एक शब्द का जिक्र किया है, जिसके कारण अरविंद केजरीवाल और उनके पूरे परिवार की नींद उड़ी है.

बेहोशी की गोली के समान है जमानत!

ये कुछ ऐसा है कि डॉक्टर ने आपको दवा दी हो, लेकिन साथ में बेहोशी की गोली भी दी हो. तो सबसे पहले सुनिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा क्या गया है, अगर आप वो शब्द पकड़ पाएं तो आप भी एक वकील से कम नहीं हैं. दोपहर 2 बजे फैसले पर जजों ने टिप्पणी शुरू की और जजों ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि केजरीवाल जेल अधीक्षक की संतुष्टि के लिए इतनी ही राशि की जमानत के साथ 50,000/- रुपये की राशि में जमानत बांड प्रस्तुत करेंगे.

इन कार्यों को न करने बाध्य हैं केजरीवाल

केजरीवाल मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय का दौरा नहीं करेंगे. केजरीवाल अपनी ओर से दिए गए बयान से बाध्य होंगे कि वो आधिकारिक फाइलों पर तब तक हस्ताक्षर नहीं करेंगे, जब तक कि यह जरूरी न हो और दिल्ली एलजी की मंजूरी/अनुमोदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक न हो. केजरीवाल वर्तमान मामले में अपनी भूमिका के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. केजरीवाल किसी भी गवाह के साथ बातचीत नहीं करेंगे और या मामले से जुड़ी किसी भी आधिकारिक फाइल तक उसकी पहुंच नहीं होगी.

अदालत ने आरोपों को बताया गंभीर

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची है कि केजरीवाल को हम अंतरिम जमानत देते हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि केजरीवाल पर लगे आरोप गंभीर नहीं हैं. ये आरोप बहुत गंभीर हैं. इसका मतलब ये है कि केजरीवाल पर जो आरोप लगे हैं, जो धाराएं लगी हैं, वो बेहद गंभीर है, ये किसी बीजेपी नेता ने नहीं कही है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने कही है. इसका मतलब ये है कि अरविंद केजरीवाल 2 तारीख को जब सरेंडर करेंगे तो वो अगली बार बाहर कब आएंगे, इसकी कल्पना खुद अरविंद केजरीवाल को नहीं होगी. 

सबूतों पर चलती है न्यायपालिका

हमारे देश में कसाब को भी अपना मुकदमा लड़ने का मौका दिया गया था, इसका ये मतलब नहीं कि न्यायालय ने कसाब को कोई छूट दी, केजरीवाल हों या कसाब, आम इंसान हो या वीआईपी, नेता बीजेपी का हो या आम आदमी पार्टी का, देश की न्यायपालिका सबूतों पर चलती है. ये बात अरविंद केजरीवाल को पता है, उन्होंने जो किया है, वो बहुत ही बड़ा अपराध है और अभी वो साबित होना बाकी है.

इसीलिए केजरीवाल अगले 20 दिनों तक बाहर रहकर भी पूरी तरह से खुश नहीं रहेंगे, उनके दिल और दिमाग में यही बात चलती रहेगी कि कहीं वो वाली फाइल जांच एजेंसियों के हाथ न लग जाएं. जिसको वो छिपाने की कोशिश कर रहे हैं.

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