नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने अपने 33 मौजूदा जजों में से 21 जजों की संपत्ति का ब्योरा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है. इस ब्योरे में जजों, उनके जीवनसाथी और संयुक्त परिवार के सदस्यों के पास मौजूद रियल एस्टेट, चल संपत्ति, सोना, शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और अन्य निवेश की जानकारी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रेस बयान में कहा कि बाकी जजों की संपत्ति का विवरण भी जल्द ही वेबसाइट पर डाला जाएगा. यह कदम 1 अप्रैल 2025 को हुई फुल कोर्ट मीटिंग के फैसले के बाद उठाया गया, जिसमें भविष्य के जजों के लिए भी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया. जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के पास एफडी और बैंक खातों में 55.75 लाख रुपए और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में 1.06 करोड़ रुपए जमा हैं.
संपत्ति सार्वजनिक करने का फैसला
पहले सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपनी संपत्ति का ब्योरा केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को देना होता था, और इसे सार्वजनिक करना वैकल्पिक था. लेकिन हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के बाद नकदी के जले हुए बंडल मिलने की खबरों ने विवाद खड़ा किया. इसने न्यायपालिका में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठाए. इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया. वेबसाइट पर अपलोड किए गए ब्योरे में कॉलेजियम के सभी पांच मौजूदा जजों की संपत्ति की जानकारी भी शामिल है, जो जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेता है.
संपत्ति में क्या-क्या शामिल?
सार्वजनिक किए गए ब्योरे में जजों के पास मौजूद मकान, जमीन, अपार्टमेंट जैसी अचल संपत्ति की जानकारी दी गई है. इसके अलावा, उनके बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार में निवेश, सोने के गहने और वाहनों जैसे चल संपत्ति का विवरण भी शामिल है. यह जानकारी जजों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों की भी है. सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि यह ब्योरा आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो, ताकि न्यायपालिका में विश्वास बढ़े.
न्यायिक नियुक्तियों का ब्योरा भी सार्वजनिक
संपत्ति के ब्योरे के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को भी अपनी वेबसाइट पर डाला है. इसमें हाई कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका, राज्य और केंद्र सरकारों से मिले इनपुट, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के विचार-विमर्श और नवंबर 2022 से मई 2025 के बीच हुई नियुक्तियों का डेटा शामिल है. यह जानकारी आम लोगों को न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया समझने और उसमें पारदर्शिता लाने के लिए दी गई है.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत-पाक तनाव के बीच देश में सुरक्षा और जवाबदेही के मुद्दे चर्चा में हैं. 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय ने 7 मई को सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल्स का निर्देश दिया है. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल न्यायपालिका में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा. पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जैसे कि मुगल वंशज सुल्ताना बेगम के लाल किला दावे को खारिज करना.