इंटरनेशनल डेस्क: ईरान में खामनेई का अंतिम संस्कार चल रहा है, करोड़ों लोग जनाजे में शामिल हो रहे हैं। ईरान का ही मित्र देश है सीरिया, जिसके दौरे पर पहुंचे हैं फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों। फ्रांस उसी नाटो समूह वाला देश है जिसकी दुश्मनी ईरान के साथ है। जबकि सीरियो को 1979 वाली इस्लामिक क्रांति के समय से ही ईरान का पक्का दोस्त माना जाता है। ऐसे में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों जब सीरिया पहुंचे तो वहां लगातार दो ब्लास्ट होते हैं। ये धमाके इतने ताकतवर थे कि बड़े इलके की जमीन हिल गई। मैक्रों जिस वीवीआईपी 'फोर सीजंस होटल' में ठहरे हुए थे, उससे महज 125 मीटर की दूरी पर ये बैक-टू-बैक ब्लास्ट हुए। इन धमाकों की तीव्रता इतनी जोरदार थी कि पूरे इलाके की धरती कांप गई और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। इस आतंकी हमले में कम से कम 18 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनमें 4 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सुरक्षित बचे राष्ट्रपति मैक्रों, काफिले तक नहीं पहुंची आवाज
फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय 'एलिसी पैलेस' ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पूरी तरह सुरक्षित हैं। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, धमाकों से ठीक पहले राष्ट्रपति मैक्रों का काफिला नए सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शराआ से द्विपक्षीय मुलाकात के लिए पैलेस की ओर रवाना हो चुका था। गनीमत यह रही कि मैक्रों के काफिले तक धमाकों की आवाज भी नहीं पहुंची। इस सुरक्षा चूक और हमले के बावजूद फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने साहस दिखाते हुए अपना तय कार्यक्रम रद्द नहीं किया और सीरिया के नए नेतृत्व के साथ अपनी बैठकें जारी रखीं।
कैसे और कहाँ अंजाम दिया गया हमला?
सीरियाई आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह हमला दमिश्क के बेहद व्यस्त और रणनीतिक माने जाने वाले इलाके में पर्यटन मंत्रालय मुख्यालय और दमिश्क नेशनल म्यूजियम के पास हुआ। हमलावरों ने पहला आईईडी (IED) सड़क किनारे खड़ी एक कार में प्लांट किया था, जबकि दूसरा ब्लास्ट चंद मीटर दूरी पर कूड़ेदान (Garbage Bin) के भीतर हुआ। जब पहली घटना के बाद वहां पुलिस और एम्बुलेंस के साथ करीब दो दर्जन लोगों की भीड़ जुटी, तभी दूसरा धमाका कर दिया गया, जिससे नुकसान ज्यादा हुआ। घटना के तुरंत बाद सीरियाई रेंजर्स और सेना ने पूरे इलाके को सील कर हर तरफ कड़ी नाकेबंदी कर दी है।
असद शासन के पतन के बाद पहली बड़ी यूरोपीय यात्रा
गौरतलब है कि साल 2024 में बशर अल-असद के तानाशाही शासन के पतन और नई सरकार के गठन के बाद इमैनुएल मैक्रों सीरिया का दौरा करने वाले पहले सबसे बड़े यूरोपीय संघ (EU) और नाटो (NATO) सदस्य देश के नेता हैं। सीरियाई युद्ध के 14 वर्षों बाद मैक्रों यहाँ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और निवेश समझौतों पर मुहर लगाने पहुंचे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर सीरिया को ईरान का सबसे पक्का रणनीतिक साझेदार माना जाता है, जबकि फ्रांस उस नाटो गुट का नेतृत्व करता है जिसकी ईरान से गहरी तल्खी है। ऐसे में ईरान के दोस्त देश में नाटो नेता के पहुंचते ही हुए इस धमाके को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सीरिया की नई व्यवस्था को अस्थिर करने की एक बड़ी कूटनीतिक साजिश के रूप में देख रहे हैं।