नई दिल्ली: भारत के अलग-अलग हिस्सों की महिलाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना उचित है या नहीं, इस पर तो घंटों बहस छिड़ सकती है. लेकिन सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो उत्तर और दक्षिण भारत की महिलाओं में भाषा, रीति-रिवाजों या परंपराओं के सिवा कोई भेदभावपूर्ण अंतर तलाशना बिल्कुल गलत है. चाहे वे उत्तर प्रदेश से हों, तमिलनाडु से या किसी अन्य प्रांत की, सभी भारतीय महिलाएं सम्मान की हकदार हैं और किसी तर्कसंगत बहाने से उनमें ऊंच-नीच का फर्क नहीं किया जा सकता.
इसी संदर्भ में तमिलनाडु के मंत्री टीआरबी राजा का एक बयान चर्चा का केंद्र बन गया है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु और उत्तर भारत में महिलाओं के प्रति समाज के नजरिए की तुलना कर नया विवाद खड़ा कर दिया. एथिराज महिला कॉलेज के एक समारोह में बोलते हुए राजा ने दावा किया, 'तमिलनाडु में महिला होना और बाकी राज्यों में इसका फर्क साफ दिखता है. सौ साल पहले पूरे भारत में महिलाओं को इंसान का दर्जा भी नहीं मिलता था. लेकिन उत्तर भारत में आज भी वही पुरानी सोच कायम है. वहां किसी महिला से बात शुरू करते ही सबसे पहले पूछा जाता है कि आपका पति कहां नौकरी करता है?
वहीं हमारे तमिलनाडु में सीधे सवाल होता है कि आप खुद कहां काम करती हैं? ये परिवर्तन एकदम से नहीं आता. यहां ऐसे माहौल को बसाने में कम से कम सौ साल तो लगे ही हैं. राजा के इस बयान का साथ दिया उनकी ही पार्टी के सीनियर नेता टीकेएस एलंगोवन ने. एलंगोवन ने तो बात को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि उत्तर भारत में धार्मिक मान्यताओं के चलते महिलाओं को अक्सर घरेलू कामकाज तक ही बांधे रखा जाता है. वे मनुस्मृति के नियमों का अनुसरण करती हैं, जो हम कभी नहीं मानते. वजह साफ है—हमारी डीएमके सरकार ने शुरू से ही महिलाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया है.
इन डीएमके नेताओं के ऐसे बयानों पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी राजा से माफी की मांग कर रहे हैं. राजनीतिक दलों ने भी इसे कटघरे में खड़ा किया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर तंज कसते हुए लिखा, 'डीएमके ने फिर से हद पार कर दी. यूपी, बिहार और पूरे उत्तर भारत का अपमान किया है.
पूनावाला ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने बिहार को 'बीड़ी' कहा, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी ने बिहार के डीएनए पर हमला बोला, डीएमके ने बिहारियों को शौचालय साफ करने वाला बताया, और अब बिहार व यूपी की महिलाओं का तिरस्कार. तेजस्वी यादव की खामोशी क्यों? 'तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने गुस्से में कहा, 'ये बयान डीएमके की संकुचित सोच को उजागर करते हैं.
धर्म को प्रगति से जोड़ना कैसे संभव है? डीएमके महिलाओं के प्रति भेदभाव ही करती है. तमिलनाडु की बहनें भी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी. ये बेहद दुखद है. लोगों को डीएमके को सबक सिखाना चाहिए. ये उनकी सस्ती राजनीति का नमूना है. एक मां के साथ ऐसा भेदभाव कैसे बर्दाश्त हो सकता है?'