नई दिल्ली: मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आया है. लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई बड़े नाम शामिल हुए. इस भोज की खास बात यह रही कि लंबे समय बाद लालू प्रसाद यादव खुद अपने बेटे के घर पहुंचे.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे तेजप्रताप से किसी तरह की नाराजगी नहीं रखते और बेटे को उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहेगा. लालू ने यह भी जोड़ा कि तेजप्रताप अब परिवार के साथ ही रहेंगे. यह बयान पिछले कई महीनों से चली आ रही पारिवारिक और राजनीतिक दूरियों को कम करने वाला माना जा रहा है. भोज में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, तेजप्रताप के मामा साधु यादव, प्रभुनाथ यादव जैसे कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
सत्ता और विपक्ष के नेताओं को निमंत्रण देकर तेजप्रताप ने इसे एक बड़ा सामाजिक-सियासी मंच बना दिया. हालांकि, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इस आयोजन में नहीं दिखे, जिससे कुछ सवाल भी उठे हैं. एक दिन पहले तेजप्रताप ने परिवार से मिलकर खुद निमंत्रण दिया था और भतीजी के साथ समय बिताकर अपनत्व का संदेश दिया था.
RJD में वापसी की चर्चा तेज
तेजप्रताप यादव पिछले साल RJD से अलग होकर अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) बना चुके हैं. लालू की मौजूदगी और उनके सकारात्मक बयानों से राजनीतिक पंडितों में यह कयास जोर पकड़ रहा है कि परिवारिक रिश्तों में आई गर्मजोशी आगे चलकर राजनीतिक एकता में बदल सकती है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
तेजप्रताप ने हाल ही में NDA के एक नेता के भोज में भी शिरकत की थी, जिससे उनकी अलग राह पर चलने की संभावना भी बनी हुई है. कुल मिलाकर, यह भोज सिर्फ दही-चूड़ा का उत्सव नहीं रहा, बल्कि बिहार की सियासत में रिश्तों और समीकरणों के नए अध्याय की शुरुआत जैसा लग रहा है. अब देखना होगा कि आगे क्या होता है.