तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय लगातार सुर्खियों में हैं। बताया जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय में एक आम नागरिक की तरह सादगी से काम करते हैं, समय पर सचिवालय पहुंचते हैं और लंबी अवधि तक फाइलों और प्रशासनिक कामों में सक्रिय रहते हैं। उनकी कार्यशैली को लेकर राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
विजय की सादगी और अनुशासन को लेकर कहा जा रहा है कि वे बिना किसी दिखावे के जनता से जुड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दल डीएमके के नेता अनीता राधाकृष्णन ने दावा किया है कि यह सरकार ज्यादा समय नहीं चल पाएगी और कुछ महीनों में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
वहीं, थलापति विजय ने इन राजनीतिक दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके फैसले जनता के हित में हैं और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी किसी पार्टी या गठबंधन के साथ कोई गुप्त राजनीतिक बातचीत नहीं चल रही है।
इसी बीच विजय ने केंद्र सरकार से दो महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। पहली, NEET परीक्षा को खत्म कर 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल एडमिशन देने की, और दूसरी, कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए कपास पर आयात शुल्क हटाने की। इन मांगों को लेकर भी राजनीतिक और आर्थिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की कर्जग्रस्त अर्थव्यवस्था और बड़े चुनावी वादों के बीच विजय के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी।