कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत, जब भारत में ही बैठे होंगे कुछ ऐसे दुश्मन, जो कंपनियों को बंद करने की मांग उठाएंगे, उद्योगपतियों के खिलाफ अभियान चलाएंगे, विदेशी पैसे खाकर भारत के लोगों की रोजी-रोटी छीनेंगे, क्या चुनाव और धमाके की ख़बरों के बीच ये पता है कि देश के चंद आंदोलनजीवियों की वजह से भारत आज एक मामले में पाकिस्तान से पीछे हो गया है...
जो भारत कभी विदेशों में करीब 3 लाख टन तांबा भेजता था, वो आज 2 लाख टन तांबा विदेश से खरीदने पर मजबूर क्यों है, जबकि पाकिस्तान आज भी लाखों टन तांबा विदेशों में बेच रहा है, मुनाफा कमा रहा है.
अब आप कहेंगे पाकिस्तान कुछ भी कर ले रहेगा तो गरीब ही, लेकिन ये वाली माइंडसेट छोड़िए, आपको समझाते हैं कैसे डीप स्टेट ने हिंदुस्तान में एक के बाद एक कई आंदोलन खड़ा करने की कोशिश की और साल 2018 में वो तमिलनाडु में सफल हो गया. ये तस्वीरें हैं तमिलनाडु के थुथुकोरिन की, जिसे अंग्रेजों के जमाने में तुतीकोरिन भी कहा जाता था, यहां वेदांता ग्रुप का एक प्लांट था स्टरलाइट....जो देश की 40 फीसदी तांबे की जरूरतें पूरी करता था....चाहे आपके घर में लगने वाला वायर हो, या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगा कॉपर, यहीं का बना होता था. और हर साल हजारों करोड़ रुपये सरकार को देता भी था....लेकिन साल 2018 में इस प्लांट को कुछ लोगों की बुरी नजर लग जाती है.
भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं, कलेक्टर ऑफिस परिसर तक तोड़फोड़ होती है और प्रदर्शन इतना उग्र हो जाता है कि पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो जाती है, नतीजा सरकार प्लांट बंद करने का आदेश जारी कर देती है, मामला अदालत पहुंचता है, पर राहत नहीं मिल पाती. लेकिन मामला संसद तक पहुंचता है, तो गृह मंत्रालय इस बात का आदेश देती है कि आखिर वो NGO कौन सा है, जिस पर विदेशी फंडिंग लेकर प्रदर्शन आयोजित करवाने के आरोप लगे हैं.
कुछ ऐसी ही कहानी दिल्ली में हुए CAA प्रदर्शन और तमाम आंदोलन में सामने आई थी, जिसके बाद पीएम मोदी ने एक बार संसद से ही ये संदेश दिया था कि देश में आजकल आंदोलनजीवी भी हो गए हैं. आंदोलन करना बुरा नहीं है, अपने हक की लड़ाई लड़ना जायज है, लेकिन इससे देश का नुकसान हो, अर्थव्यवस्था हिल जाए, आपका दुश्मन मजबूत हो तो फिर वो जायज कैसे हो सकता है. क्या तमिलनाडु सरकार ने जिस प्रदूषण के आधार पर इस पर ताला लगाया, उसी आधार पर दिल्ली की हजारों कंपनियां बंद हो सकती हैं...क्योंकि यहां तो AQI 1000 के पार है, अगर नहीं तो फिर दोहरा रवैया क्यों...क्या कोई निजी दुश्मनी वेदांता ग्रुप से वहां की मौजूदा सरकार ने निभाया.
इसकी कहानी साल में तब खुलती है, जब देश कोरोना से जूझ रहा था, तब यही बंद प्लांट सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के लिए खोला जाता है,....कहा जाता है तब भी तमिलनाडु सरकार ने आपत्ति जताई थी, लेकिन अदालत ने साफ पूछा था क्या इस ग्रुप से आपकी निजी दुश्मनी है, आखिर ऑक्सीजन आपूर्ति में क्या समस्या है...तब जाकर प्लांट कुछ दिनों के लिए खुला, लेकिन फिर से इस पर ताला लटक गया...और आज ये कंपनी अपना भविष्य तलाश रही है, कानूनी लड़ाई के साथ-साथ शिफ्टिंग का प्लान बना रही है, क्योंकि इसे बंद होने से रोजाना करीब 5 करोड़ का नुकसान कंपनी को हुआ,...और देश को अब कितना नुकसान हो रहा है, इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि तांबा बेचकर पैसा कमाने वाला भारत आज करोड़ों देकर तांबा खरीद रहा है, और जिन लोगों को रोजगार छीना वो अलग...फिर यही आंदोलनकारी कहेंगे देश में रोजगार नहीं है...देश में महंगाई बढ़ रही है....हमारे कहने का कतई ये मतलब नहीं है कि प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई न हो, पर ताला लगाना किसी समस्या का समाधान नहीं होता...