नई दिल्ली: अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिव शामिल हुए.
बैठक में निकली 5 अहम बातें...
- मानसून पर अल नीनो का असर: IMD ने बताया कि जून में कुछ राज्यों (गुजरात, MP, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र) में मानसून 10 दिन देरी से पहुंचा. 7 जुलाई तक देश में बारिश की कमी अब -12% रह गई है. जुलाई-अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की संभावना है.
- खेती और फसलों की तैयारी: सरकार ने 262 संवेदनशील जिलों के लिए Contingency Plan अपडेट कर लिया है. ICAR ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए SOP जारी किए हैं. फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं.
- खाद्य सुरक्षा और स्टॉक: चावल, गेहूं और दालों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है. उर्वरकों की उपलब्धता भी सामान्य बताई गई. दोनों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं.
- पानी, बिजली और पशु चारे की तैयारी: जलाशयों और भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर है. पशुपालन विभाग को सूखे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए. बिजली उत्पादन पर भी नजर रखी जा रही है.
- रोजगार और स्वास्थ्य: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार' मिशन के तहत अब तक 1 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित हो चुका है. स्वास्थ्य विभाग ने हीट वेव, डेंगू आदि को लेकर एडवाइजरी जारी की है.
PMO का सख्त संदेश
प्रधान सचिव ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो प्लानिंग करें और स्थिति की लगातार निगरानी रखें ताकि कृषि, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर अल नीनो का न्यूनतम प्रभाव पड़े.
CREA का चेतावनी भरा विश्लेषण
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, इस बार अल नीनो का सबसे ज्यादा असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ सकता है. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अल नीनो को कोई भी चुनौती नहीं मान रही है और पूरे साल भर तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी.
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