कोलकाता : बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर दबा असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर हुई विधायक दल की बैठक ने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी में सब कुछ सामान्य नहीं है. यह बैठक सिर्फ चुनावी समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई नेताओं ने खुले तौर पर शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा दिए.
सबसे ज्यादा चर्चा 15 विधायकों की गैरमौजूदगी और कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को लेकर रही. पार्टी नेतृत्व ने पहले ही निर्देश दिया था कि शिकायतें केवल लिखित रूप में दी जाएं, लेकिन इसके बावजूद कई विधायक एकजुट होकर बैठक में पहुंचे और उन्होंने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए. विवाद का केंद्र फलता सीट से उम्मीदवार रहे जहांगीर खान बने, जिन्हें अभिषेक का करीबी माना जाता है. नेताओं ने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले मैदान छोड़ने के बावजूद उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. कुछ विधायकों ने तंज कसते हुए कहा कि संगठन में कुछ नेताओं को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है.
बैठक के दौरान पार्टी के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठा. नेताओं का कहना था कि अब बंद कमरों की राजनीति छोड़कर जनता के बीच जाकर संघर्ष करने की जरूरत है. वहीं, कई विधायकों की अनुपस्थिति और कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क की चर्चाओं ने तृणमूल की चिंता और बढ़ा दी है. इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर नेतृत्व, रणनीति और संगठन को लेकर गंभीर मतभेद उभरने लगे हैं, जो आने वाले दिनों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.