कोलकाता: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिला के ग्रामीणों ने सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाउडस्पीकर का सहारा लिया है. एक स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता ने वादा किया था कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से ली गई “कट मनी” 4 जून तक वापस कर देंगी. अब ग्रामीण लगातार लाउडस्पीकर पर घोषणाएं करके सभी लोगों, खासकर टीएमसी नेता को, इस वादे की याद दिला रहे हैं.
“कट मनी” उस कथित अवैध कमीशन को कहा जाता है, जिसे पश्चिम बंगाल में कुछ स्थानीय राजनेताओं या बिचौलियों द्वारा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और विकास निधियों का लाभ दिलाने या मंजूरी दिलाने के बदले वसूला जाता है.
कूचबिहार दक्षिण क्षेत्र के घुघुमारी ग्राम पंचायत के बूथ संख्या 173 में यह घोषणाएं उस समय शुरू हुईं, जब ग्रामीणों ने टीएमसी पंचायत सदस्य ज्योत्सना बर्मन के घर के बाहर प्रदर्शन किया. ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजना के लाभार्थियों को योजना का लाभ पाने और भविष्य की किस्तों में देरी से बचने के लिए 5,000 रुपए से लेकर 25,000 रुपए तक की रिश्वत देनी पड़ी. उनका कहना है कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान कई परिवारों ने डर के कारण यह रकम चुकाई थी.
लाउडस्पीकर घोषणाओं के अलावा, ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर मार्च भी निकाले और ज्योत्सना बर्मन को उनके उस वादे की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने 4 जून तक “कट मनी” लौटाने की बात कही थी.
यह मामला तब सामने आया जब भाजपा ने टीएमसी के 15 साल पुराने शासन का अंत करते हुए विधानसभा चुनावों में 207 सीटें जीत लीं. सत्ता परिवर्तन के बाद ग्रामीणों ने कथित रूप से वसूली गई रकम वापस करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आंदोलन तब स्थगित कर दिया गया जब बर्मन और अन्य स्थानीय नेताओं ने आश्वासन दिया कि पूरी राशि 4 जून तक लौटा दी जाएगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह वादा भुलाया न जाए, ग्रामीणों ने पूरे इलाके में लाउडस्पीकर के माध्यम से रोज़ाना इस समय-सीमा की घोषणा शुरू कर दी है, जिससे गांव की सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली वादे की याद दिलाने का माध्यम बन गई है.
ग्रामीणों ने कहा है कि वे 4 जून तक “कट मनी” की वापसी पर कड़ी निगरानी रखेंगे. यदि तय समय-सीमा तक पैसा वापस नहीं किया गया, तो वे फिर से आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे.