पटना: बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित एक मंदिर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बोर्ड ने इस फैसले का कारण 2019 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट को बताया, जिसे समुदाय के लिए 'मील का पत्थर' करार दिया गया है.
बोर्ड की पहली बैठक में सदस्य रंजन सिंह द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया. बोर्ड का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के पास अपना मंदिर नहीं है और यह प्रस्ताव PM मोदी को समुदाय को दिए गए सम्मान और अधिकारों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है.
2019 कानून का महत्व
ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट 2019 भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने वाला पहला केंद्रीय कानून है. इसमें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और सार्वजनिक सेवाओं में भेदभाव को प्रतिबंधित किया गया है. कानून के तहत पहचान प्रमाण पत्र जारी करने, कल्याण योजनाओं और संस्थागत तंत्र बनाने का प्रावधान है. बिहार में पिछले साल अगस्त में सोशल वेलफेयर विभाग के तहत राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन हुआ था, जो समुदाय के सामाजिक विकास और सशक्तिकरण के लिए काम करता है.
विवाद और प्रतिक्रिया
प्रस्ताव को कुछ ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से आलोचना भी मिल रही है. कई संगठनों का कहना है कि 2019 कानून में स्व-पहचान की प्रक्रिया में नौकरशाही बाधाएं हैं और शिक्षा-रोजगार में आरक्षण जैसी मांगें पूरी नहीं हुईं.
बोर्ड के अनुसार, मंदिर धार्मिक से ज्यादा प्रतीकात्मक महत्व रखता है, जो समुदाय को दिए गए कानूनी मान्यता का आभार है. निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन और अन्य स्वीकृतियां जरूरी होंगी. यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के नाम पर मंदिर बनाने का दुर्लभ उदाहरण होगा, जो बिहार में ट्रांसजेंडर समुदाय की राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता को भी दर्शाता है.