"हम दिल्ली जाएंगे तो लाल बत्ती नहीं, मीठा पानी लेकर आएंगे"- रविन्द्र भाटी, निर्दलीय प्रत्याशी.
ये रविन्द्र भाटी का वो बयान है जिसने हर प्रत्याशी के पांव उखाड़ दिए हैं, और रविन्द्र भाटी की सियासी पैठ मजबूत कर दी है, पर कहते हैं चुनाव सिर्फ बयानों से नहीं जीता जाता, इसलिए रविन्द्र सिंह भाटी ने इस बार माही की तरह हेलीकॉप्टर शॉट लगाने की तैयारी की है, कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है, जिसने हर नेता की धड़कनें बढ़ा दी है और भारतीय चुनाव के इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड कायम हो गया है. राजस्थान की बाड़मेर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रविन्द्र सिंह भाटी पहले ऐसे उम्मीदवार बन गए हैं, जो हेलीकॉप्टर से अपना चुनाव प्रचार कर रहा है, और इसे कंगना रनौत के रोड शो और द ग्रेट खली की रैली को जवाब देने के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि जनता के बीच ये संदेश जाए कि हमारा निर्दलीय प्रत्याशी भी कमजोर नहीं है.
हालांकि अब तक हेलीकॉप्टर से प्रचार सिर्फ वही प्रत्याशी कर पाते हैं जो किसी न किसी पार्टी से जुड़े होते हैं. क्योंकि इसमें काफी खर्चा आता है, पर रविन्द्र सिंह भाटी ने ये वाला मिथक भी तोड़ दिया और साफ कहा कि हेलीकॉप्टर से अपने लोकसभा क्षेत्र का हवाई सर्वे करूंगा. लेकिन सियासी समीकऱण इस सर्वे से काफी अलग हैं.
2009 में परिसीमन से पहले इस सीट पर राजपूतों का हमेशा से वर्चस्व रहा. लेकिन जीत हमेशा जाट उम्मीदवार की होती आई है. ऐसे में राजस्थान का जाट वोट बैंक कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के पक्ष में नजर आया है. कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेदाराम के उतरने से जाट वोट का बंटना तय है. वहीं राजपूत भाजपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है, लेकिन रविंद्र सिंह के निर्दलीय लड़ने से राजपूतों के कुछ वोट भाटी के समर्थन में जा सकते हैं. युवा वोटर भी इस सीट पर निर्णायक साबित होंगे. भाटी को युवाओं का अच्छा खासा समर्थन हासिल है. इसके अलावा इस सीट पर चारण, सुनार, सुथार, बिश्नोई, कुम्हार, राजपुरोहित, वैश्य आदि वोट भी ठीक-ठाक संख्या में हैं.
ऐसे में इस समाज को साधना भाटी के लिए बड़ी चुनौती है. क्योंकि ये सभी भाजपा के परंपरागत वोटर रहे हैं. हालांकि बेरोजगारी और पेपरलीक जैसे मुद्दों के जरिए उन्होंने विधानसभा में तो वोट बटोर लिए लेकिन लोकसभा चुनाव अगर राष्ट्रीय मुद्दों पर हुआ और जनता ने ये सोचा कि हमें मोदी के 400 पार वाले सपने को पूरा करना है तो फिर रविन्द्र भाटी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, ये तो पहली मुश्किल की बात हुई, जिससे पार पाने के लिए रविन्द्र सिंह भाटी की रणनीति ये होगी कि चुनाव को स्थानीय मुद्दे पर ही रखा जाए, इसीलिए वो लगातार कह रहे हैं कि दिल्ली जाऊंगा तो लालबत्ती नहीं लाऊंगा बल्कि मीठा पानी लाऊंगा,क्योंकि राजस्थान के कई इलाकों में आज भी पीने के पानी की समस्या बड़ी है. लेकिन रविन्द्र सिंह भाटी के सामने चुनौती ये है कि क्या वो बाड़मेर लोकसभा सीट के सभी 7 विधानसभा सीटों पर वो अपनी पकड़ मजबूत बना पाएंगे.
यहां स्थानीय मुद्दे से ज्यादा जाति का मुद्दा हावी है, इसीलिए बीजेपी और कांग्रेस ने जाट प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा है जबकि राजपूत समाज से रविन्द्र सिंह भाटी चुनावी मैदान में हैं. अब देखना ये होगा कि बाड़मेर की जनता किसे जीताती है.