रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने बलात्कार पीड़िताओं के सम्मान और पुनर्वास को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया है.
साथ ही पीड़िताओं के बच्चों को कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति सुनिश्चित करने का भी ऐलान किया गया है. चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने रेप सर्वाइवर्स की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह फैसला सुनाया.
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
बच्चों के भविष्य की चिंता
कोर्ट ने कहा कि बलात्कार से जन्मे बच्चों को कक्षा 12 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी जाएगी. हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. यदि ये बच्चे IIT, NIT, AIIMS या IIM जैसे संस्थानों में दाखिला पाते हैं तो राज्य सरकार उन्हें छात्रवृत्ति भी प्रदान करेगी.
आत्मरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य
सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की सभी छात्राओं को ‘रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण’ दिया जाएगा. इसमें रोजमर्रा की चीजों (चाबी, दुपट्टा, पेन आदि) को हथियार के रूप में उपयोग करना सिखाया जाएगा. कोर्ट ने पीड़िताओं के सामाजिक बहिष्कार और उपहास पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि समाज को “पीड़ित को दोषी ठहराने” की मानसिकता बदलनी होगी. यह फैसला न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है.