UGC का लखनऊ, देवरिया, मेरठ, गाजियाबाद, पीलीभीत में भारी विरोध, पुलिस से झड़प तक की आई नौबत!

Amanat Ansari 29 Jan 2026 01:26: PM 2 Mins
UGC का लखनऊ, देवरिया, मेरठ, गाजियाबाद, पीलीभीत में भारी विरोध, पुलिस से झड़प तक की आई नौबत!

नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026 नाम से नए नियम जारी किए हैं. इनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, नस्ल या विकलांगता आधारित भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना और समानता व समावेश को बढ़ावा देना है. ये नियम 2012 के पुराने फ्रेमवर्क की जगह लेते हैं और अब इन्हें सख्ती से लागू किया जा रहा है.

सरकार और UGC इसे कैंपस में निष्पक्षता और सुरक्षा का मजबूत कदम बता रही है, जिसमें हर संस्थान को इक्विटी कमिटी, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) और 24x7 हेल्पलाइन बनानी होगी. शिकायतों का समयबद्ध निपटारा अनिवार्य है, और गैर-अनुपालन पर संस्थानों को UGC फंडिंग से वंचित करने या मान्यता रद्द करने जैसी सजा हो सकती है.

लेकिन इन नियमों को लेकर व्यापक विवाद खड़ा हो गया है. विरोध करने वाले, खासकर जनरल कैटेगरी के छात्र और कुछ संगठन, दावा करते हैं कि ये प्रावधान एकतरफा हैं. वे कहते हैं कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों पर शक की नजर पड़ सकती है, झूठी शिकायतों का खतरा बढ़ सकता है, और कैंपस में सामाजिक तनाव फैल सकता है. कुछ इसे 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' या सवर्ण विरोधी बताते हैं.

यूपी में बड़े स्तर पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में विरोध काफी तेज है. लखनऊ, देवरिया, मेरठ, गाजियाबाद, पीलीभीत और अन्य जिलों में छात्र सड़कों पर उतरे हैं. प्रदर्शन में मुंडन, काली पट्टी बांधना, कफन पहनना या जंजीरों से बंधकर विरोध जैसी तस्वीरें सामने आई हैं. देवरिया और मेरठ में पुलिस से झड़पें भी हुईं. BJP के अंदर भी यह मुद्दा गरमा गया है.

कई नेताओं का इस्तीफा

कई स्थानीय स्तर के नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं. मऊ जिले में सेक्टर अध्यक्ष राम सिंह सहित 20 पदाधिकारियों (पांच बूथ अध्यक्षों समेत) ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. उन्होंने त्यागपत्र में लिखा कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक रही है और UGC नियमों से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. लखनऊ में भी 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, नोएडा BJP युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित जैसे नाम भी इस्तीफों में शामिल हैं.

  • वरिष्ठ BJP नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने इन नियमों को असंवैधानिक करार दिया और संशोधन या वापसी की मांग की. उन्होंने कहा कि ये न्याय और सामाजिक समरसता के खिलाफ हैं. डॉ. महेश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर आपत्तियां दर्ज कीं.

वाराणसी में BJP विधायक अवधेश सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए नियमों की जानकारी न होने की बात कही और विपक्ष पर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया.

  • पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे सनातन धर्म को बांटने वाला बताया और सवर्ण, पिछड़े व दलित समाज से एकजुट विरोध की अपील की. कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने चिंता जताई कि कहीं सवर्ण होना अपराध न बन जाए.

केंद्र सरकार ने सफाई दी है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा. शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी. सुप्रीम कोर्ट में भी इन नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल हो चुकी है. कुल मिलाकर, UGC के ये नए नियम सामाजिक न्याय के नाम पर आए हैं, लेकिन इन्होंने जनरल कैटेगरी में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है, जिसकी वजह से छात्र आंदोलन और BJP में भी इस्तीफों का सिलसिला जारी है.

UGC Supreme Court BJP UGC resignation UGC protest

Recent News