नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित जल सप्लाई के कारण लोगों की मौतें लगातार बढ़ रही हैं. अब तक कम से कम 10 से 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों मरीज विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में मरीजों की संख्या 2800 से ज्यादा बताई जा रही है. इस मामले में राज्य सरकार को हाईकोर्ट में दी गई रिपोर्ट में मौतों की संख्या केवल चार बताई गई, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है. अब अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इस घटना का स्वत: संज्ञान लिया है और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इसी बीच बीजेपी की वरिष्ठ नेता और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि 2025 के अंत में इंदौर में जहरीले पानी से हुई इन मौतों ने पूरे प्रदेश, सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है.
उन्होंने इंदौर के बार-बार सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार जीतने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि ऐसे शहर में इतनी गंदगी और लापरवाही कैसे हो सकती है, जहां पानी में जहर घुल गया और जानें जाती रहीं. उमा भारती ने स्पष्ट कहा कि किसी इंसान की जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपये का मुआवजा नहीं हो सकती, क्योंकि परिजन आजीवन इस सदमे में जीते हैं. इस गुनाह का कठोर प्रायश्चित जरूरी है, पीड़ितों से माफी मांगी जानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों, चाहे छोटे कर्मचारी हों या बड़े अधिकारी हों, सभी को को सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए.
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए इसे परीक्षा की घड़ी बताया और कुछ तीखे सवाल भी उठाए, जैसे कि जिम्मेदारी न निभा सके तो पद पर बैठकर बोतलबंद पानी पीते रहने का क्या मतलब? महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि मौतें दूषित पानी से ही हुईं. मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी यही बात स्वीकारी है.
यह घटना इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज से सीवर का पानी मिलने के कारण हुई, जिसकी वजह से डायरिया और उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला. सरकार ने कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है और जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है.