नेपाल की गंडक नदी में एकतरफा खनन से भारत में बढ़ी चिंता, बिना अनुमति दिया जा रहा खनन का ठेका

Amanat Ansari 23 May 2026 12:13: PM 2 Mins
नेपाल की गंडक नदी में एकतरफा खनन से भारत में बढ़ी चिंता, बिना अनुमति दिया जा रहा खनन का ठेका

Unilateral mining in Nepal Gandak River: भारत-नेपाल संबंधों में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है. गंडक नदी में नेपाल की तरफ से बिना किसी सूचना या समन्वय के बड़े पैमाने पर अवैध खनन शुरू किए जाने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता बढ़ गई है. नेपाल के पश्चिम नवलपरासी जिले की सुस्ता गांवपालिका ने गंडक नदी की मुख्य धारा से बालू, पत्थर और गिट्टी निकालने का बड़ा ठेका एक निजी कंपनी को दे दिया है.

यह काम पूरी तरह एकतरफा तरीके से शुरू किया गया, जिसमें भारतीय पक्ष को कोई जानकारी नहीं दी गई. यह खनन कार्य बी गैप बांध के सुरक्षा क्षेत्र के बेहद करीब हो रहा है, जिसे लेकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सिंचाई विभाग ने तीखी आपत्ति दर्ज की है.

संयुक्त बैठक के फैसले की अनदेखी

30 अप्रैल को काठमांडू में भारत-नेपाल के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों पक्षों ने सहमति जताई थी कि गंडक नदी क्षेत्र में कोई भी बदलाव या निर्माण कार्य संयुक्त समिति बनाए बिना नहीं किया जाएगा. लेकिन नेपाल ने इस समझौते की धज्जियां उड़ा दीं.
जब भारतीय और नेपाली इंजीनियरों की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया तो वहां हेवी मशीनरी और ट्रकों से बड़े पैमाने पर नदी की खुदाई चल रही थी.

बाढ़ का बढ़ता खतरा

भारतीय अधिकारियों ने सुस्ता गांवपालिका के अध्यक्ष टेक नारायण उपाध्याय को साफ चेतावनी दी कि इस बेतरतीब खनन से नदी का रुख बदल सकता है, जिसके परिणामस्वरूप, सुस्ता बांध और गंडक मुख्य बांध को खतरा उत्पन्न हो सकता है. उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भारी बाढ़ का जोखिम गहरा सकता है.

गौरतलब है कि पिछले साल भी इसी तरह की खुदाई के कारण नदी का पानी सुस्ता और नरसही क्षेत्र की ओर मुड़ गया था, जिससे काफी नुकसान हुआ था. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारी अब नेपाल के नवलपरासी जिले के जिलाधिकारी से इस काम पर तुरंत रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.

लिपुलेख विवाद भी गरमाया

गंडक नदी विवाद के साथ ही लिपुलेख दर्रे का मुद्दा भी फिर से उछल आया है. भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अभिन्न अंग मानता है, जबकि नेपाल का नया नेतृत्व अपना दावा जता रहा है. हाल ही में भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को पारंपरिक लिपुलेख मार्ग से फिर शुरू करने पर सहमति बनी थी, जिस पर नेपाल ने ऐतराज जताया है. साथ ही भंसार (सीमा शुल्क) को लेकर चल रहे विवाद ने भी सीमावर्ती व्यापार को प्रभावित किया है.

यह पूरा घटनाक्रम नेपाल में नई सरकार बनने के बावजूद सीमा मुद्दों पर सकारात्मक बदलाव न आने का संकेत दे रहा है. दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती को ऐसे मुद्दे बार-बार चुनौती दे रहे हैं. स्थिति अभी संवेदनशील बनी हुई है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है.

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