पहले PM भी थे सदस्य, 30 साल लगते हैं मेंबरशिप में... आखिर क्यों खास है दिल्ली जिमखाना क्लब?

Amanat Ansari 23 May 2026 09:22: PM 1 Mins
पहले PM भी थे सदस्य, 30 साल लगते हैं मेंबरशिप में... आखिर क्यों खास है दिल्ली जिमखाना क्लब?

नई दिल्ली: देश की राजधानी का सबसे मशहूर और एलीट दिल्ली जिमखाना क्लब अब विवादों में है. केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश दे दिया है. केंद्र के आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को यह नोटिस जारी किया. मंत्रालय ने कहा कि सफदरजंग रोड पर स्थित यह क्लब संवेदनशील और रणनीतिक इलाके में आता है, इसलिए यहां सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है.

क्लब से जुड़े अहम तथ्य

  • इतिहास: क्लब की स्थापना 3 जुलाई 1913 को हुई थी. शुरू में इसका नाम ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ था.
  • पहले सदस्य: इसके शुरुआती सदस्यों में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह, प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह और कई दिग्गज राजनेता शामिल थे.
  • जमीन: 1928 में ब्रिटिश सरकार ने नई दिल्ली बनाते समय क्लब को सफदरजंग रोड पर 27.3 एकड़ की बेहद कीमती जमीन लीज पर दी थी.
  • डिजाइन: क्लब की इमारत और लेआउट का डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टॉर रसेल ने तैयार किया था, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन भी डिजाइन किए थे.
  • आजादी के बाद: 1947 में ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया और क्लब का नाम सिर्फ ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ हो गया.

मेंबरशिप क्यों इतनी मुश्किल?

दिल्ली जिमखाना क्लब को भारत के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है. यहां सदस्यता पाने के लिए कई बार 30 साल तक इंतजार करना पड़ता है. प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, उच्च अधिकारियों, राजपरिवारों और टॉप कारोबारियों का यहां लंबे समय से जुड़ाव रहा है.

सरकार के आदेश में लीज एग्रीमेंट के क्लॉज 4 का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अगर परिसर को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए जरूरत पड़ी तो सरकार इसे वापस ले सकती है. राष्ट्रपति के आदेश से अब लीज समाप्त कर दी गई है और क्लब को तुरंत परिसर खाली करने को कहा गया है. यह खबर राजधानी के सियासी और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है.

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