लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में सरकारी अनुदान के दुरुपयोग और परिवारवाद के गंभीर आरोप सामने आए हैं. शिकायतकर्ता तल्हा अंसारी की ओर से की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. आरोप है कि करीब 1100 करोड़ रुपये के वार्षिक सरकारी बजट वाले मदरसा तंत्र में कई संस्थानों को कुछ परिवारों ने अपना परिवार डेवलपमेंट सिंडिकेट बना लिया है.
शिकायत के अनुसार बाराबंकी, जौनपुर, बस्ती और कुशीनगर के कई मदरसों में एक ही परिवार के कई सदस्य सरकारी वेतन प्राप्त कर रहे हैं. इतना ही नहीं, कुछ मामलों में विदेशों में रहने वाले लोगों को भी ड्यूटी पर दिखाकर वेतन निकालने के आरोप लगाए गए हैं. बाराबंकी के रसौली स्थित मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम में प्रबंधक अयाज अहमद पर अपनी पत्नी जेबा बानो और रिश्तेदार मोहम्मद शब्बीर की नियुक्ति कराने का आरोप है. दावा किया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान उन्होंने प्रबंधक पद अपने चाचा को सौंप दिया और नियुक्तियां पूरी होने के बाद दोबारा पद संभाल लिया.
जौनपुर के मछलीशहर स्थित मदरसा रियाजुल उलूम में प्रधानाचार्या महजबी बेगम, उनके पति, दो पुत्रों और कई रिश्तेदारों के सरकारी पदों पर होने का मामला सामने आया है. वहीं, बस्ती के कप्तानगंज स्थित मदरसा अहले सुन्नत फैजुन्नबी में प्रबंधक मुनीर अली पर अपने पांच दामादों की नियुक्ति कराने का आरोप लगाया गया है.
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियुक्तियों के समय नियमों को दरकिनार करने के लिए प्रबंधकों द्वारा अस्थायी इस्तीफे का तरीका अपनाया गया और बाद में दोबारा पद संभाल लिया गया. अब पूरे मामले की जांच और सरकारी धन के उपयोग की पड़ताल की मांग तेज हो गई है.