वाशिंगटन: मध्य पूर्व का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. सूत्रों के मुताबिक, अगर ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक कोशिशें नाकाम रहीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर बड़ा सैन्य हमला करने का गंभीर विचार कर रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रंप ने इस वीकेंड के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और व्हाइट हाउस वापस लौट आए.
शुक्रवार को उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स के साथ अहम सुरक्षा बैठक की. बैठक में अधिकारियों ने ट्रंप को विभिन्न सैन्य विकल्पों की जानकारी दी, ताकि अगर बातचीत पूरी तरह विफल हो गई तो अमेरिका अगला कदम क्या उठा सकता है.
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की कोशिश
दूसरी तरफ शांति की अंतिम कोशिशें भी जारी हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अचानक तेहरान पहुंचे और उन्होंने IRGC के वरिष्ठ जनरल अहमद वाहिदी से मुलाकात की. साथ ही कतर की एक उच्चस्तरीय टीम भी मध्यस्थता के लिए ईरान पहुंची है. हालांकि, वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान तो हो रहा है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल रहा. ईरानी पक्ष साफ कह चुका है कि जब तक युद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक अन्य किसी मुद्दे पर बात नहीं होगी.
शुरुआत में ट्रंप इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को डिप्लोमेसी का एक और मौका देने के पक्ष में थे, लेकिन अब उनकी धारणा बदलती दिख रही है. उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि वे एक निर्णायक सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं, जिससे इस पूरे संकट को तेजी से खत्म किया जा सके.
ईरान ने तेजी से बहाल किया अपना सैन्य तंत्र
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष थमने के बाद ईरान ने अपने ड्रोन उत्पादन और सैन्य बुनियादी ढांचे को अपेक्षा से कहीं तेज गति से फिर से खड़ा कर लिया है. यह विकास अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए नई चिंता का विषय बन गया है. कुल मिलाकर, फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों ही रास्ते एक साथ चल रहे हैं, लेकिन परिणाम अभी अनिश्चित है.