अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत को कहा जेनोफोबिक तो एस जयशंकर ने दिया करारा जवाब

Global Bharat 04 May 2024 05:06: PM 1 Mins
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत को कहा जेनोफोबिक तो एस जयशंकर ने दिया करारा जवाब

कुछ ही दिन पहले भारत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विवादित बयान दिया था. उन्होंने भारत को जेनोफोबिक यानी विदेशियों के प्रति ज्यादा नापसंदगी या डर रखने वाला बताया था. इसको लेकर अब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने करारा जवाब दिया है और बाइडेन के बयान को सिरे से खारिज कर दिया.

एस जयशंकर ने कहा कि भारत विभिन्न समाज के लोगों का स्वागत करता है और हमारा देश मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता है. एस जयशंकर ने कहा कि मैं वास्तव में कहूंगा कि दुनिया के इतिहास में भारत ऐसा देश रहा है, जिसने जरूरतमंद की हमेशा मदद की है. अलग-अलग समाजों से अलग-अलग लोग भारत आते हैं और इसीलिए हमारा देश सबसे खास बन जाता है.

विदेश मंत्री ने सीएए को लेकर ये कहा...

हाल ही में देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ है. इसके लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे पास नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) है, जो उन लोगों के लिए दरवाजे खोलता के लिए है जो दूसरे देशों में मुसीबत में हैं. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमें उन लोगों के लिए अपने दरवाजे खुले रखने चाहिए जिन्हें भारत आने की जरूरत है, जो भारत आना चाहते हैं.

CAA की आलोचना करने वालों को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सीएए की वजह से इस देश में दस लाख मुसलमान अपनी नागरिकता खो देंगे. उनसे जवाब क्यों नहीं लिया जा रहा है? क्या अब तक किसी की नागरिकता गई है?

भारत को टारगेट कर रहा पश्चिमी मीडिया

एस जयशंकर इस दौरान बेहद ही आक्रामक नजर आए. उन्होंने कहा कि एक खास विचार से प्रभावित पश्चिमी मीडिया का एक वर्ग ग्लोबल नेरेटिव चलाकर भारत को टारगेट करने की कोशिश कर रहा है. यह वह वर्ग है जो हमेशा से मानता रहा है कि उन्हें ग्लोबल नेरेटिव को कंट्रोल करना चाहिए.

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि ऐसे लोगों ने कई मामलों में अपने राजनीतिक स्वार्थ को भी उजागर कर दिया. उन्होंने भारत में दूसरे राजनीतिक दलों का खुला समर्थन करने का संकेत दिया है. वे खास मुद्दों पर आगे आए हैं और अपना एजेंडा पुश करने तक का प्रयास किया है. अगर वे कोई बयान देते हैं या फैसला सुनाते हैं, तो आपको इन्हें पहचानना चाहिए कि ये विचार आ कहां से रहे हैं.

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