
ये तस्वीर किसी छोटे-मोटे अस्पताल की नहीं है, बल्कि एम्स जैसे बड़े अस्पताल की है. जहां की तीसरी मंजिल पर पुलिस गाड़ी लेकर पहुंच जाती है. वह जो रास्ता मरीजों का स्ट्रेचर लेकर जाने के लिए बना होता है उसी रास्ते पुलिस जीप लेकर इमजरेंसी वार्ड में घुस जाती है. कहीं नर्स स्ट्रेचर लेकर भाग रही है, तो कहीं मरीज जान बचाकर भाग रहे हैं. किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आखिर ये हुआ क्या.
कुछ लोग कान में फूसफूसाते हैं कि सालों पहले जो मुंबई में हुआ था कहीं कुछ ऐसा तो नहीं था. तब वहां अस्पताल में कुछ पाकिस्तानियों के घुसे होने की ख़बर पुलिस को मिली थी और पुलिस अस्पताल में पहुंचती उससे पहले ही उन्होंने अपनी नापाक हरकतों को अंजाम दे दिया था. उत्तराखंड पुलिस जिस तेजी में जीप दौड़ा रही थी उसे देखकर साफ लग रहा था कि मामला बड़ा है.
पहले तस्वीर वायरल हुई फिर इसकी पूरी कहानी उत्तराखंड पुलिस ने विस्तार से बताई. आईजी गढ़वाल करन सिंह नान्याल का कहना है कि हम इसकी जांच कराएंगे. पुलिस का कहना है कि 19 मई की शाम एम्स ऋषिकेश में काम करने वाली एक महिला डॉक्टर ने हमें शिकायत दी थी. उसने शिकायत में लिखा था कि जब मैं ऑपरेशन थिएटर में थी नर्सिंग ऑफिसर ने उनके साथ छेड़छाड़ करने का प्रायस किया. विरोध करने भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया और रात को उसने व्हाट्सऐप पर आपत्तिजनक मैसेज भेजा.
इधर शिकायत दर्ज हुई उधर डॉक्टर्स ने हॉस्पिटल में हड़ताल शुरू किया. पुलिस को इनपुट मिला कि अगर वक्त पर नहीं पहुंचे तो आरोपी को पकड़ककर भीड़ कुछ भी कर सकती है. इसीलिए पुलिस ने तेजी में गाड़ी दौड़ाते हुए सीधा इमरजेंसी वार्ड में जाने का फैसला किया. हालांकि सवाल ये उठता है कि अगर किसी तरह का हादसा हो जाता तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होता.