Waqf Board: 20 मई की दोपहर करीब 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन बिल पर सुनवाई शुरू होती है, सामने बैठे होते हैं सीजेआई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह, कानून के पक्ष में दलील देने के लिए फाइल लेकर खड़े होते हैं सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता और उनकी टीम जबकि मुस्लिम पक्ष की पैरवी के लिए खड़े थे कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट हुजेफा अहमदी.
जिसे सुनते ही कपिल सिब्बल कुछ और नई दलील देने लगते हैं, लेकिन आप जरा सोचिए कैसे भरी अदालत में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले सिब्बल और सिघंवी की जोड़ी इस बार मुस्लिम धार्मिक स्थलों के लिए अलग-अलग दलील ढूंढकर ला रही है, अदालत में ये कह रही है कि जज साहब वक्फ की संपत्तियों का इतिहास 200, 400, 500 साल पुराना है, वो कागज कहां से लाएंगे, फिर सवाल ये उठता है कि अयोध्या केस में जब सुनवाई हो रही थी, तब राम मंदिर के सबूत क्यों मांगे जा रहे थे, वो तो कई हजार साल पुराना है, वो तो शास्त्रों में सबकुछ प्रमाणित है, जिसे जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर समझाया तब जाकर जज साहब को पूरी बात समझ आई और फैसला मंदिर के पक्ष में आया. लेकिन अब एक ग्रुप वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर कागज नहीं दिखाएंगे का नैरेटिव चलाने की कोशिश में है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान ये साफ कर दिया है कि
अब मामले की सुनवाई 21 मई को होनी है, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीन मुद्दों पर सुनवाई की बात कही थी, जिसे लेकर केन्द्र सरकार ने 1300 पेज का हलफनामा दिया था, उसमें साफ बताया थी वक्फ बाय यूजर और वक्फ बोर्ड को लेकर उठ रहे सवाले बेवजह क्यों हैं, हालांकि कपिल सिब्बल की अब मांग है कि तीन मुद्दों के अलावा बाकी मुद्दों को भी ध्यान में रखा जाए, सिब्बल यहां अपनी वकालत का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं, और उन्हें करना भी चाहिए, लेकिन यही मुद्दा जब मंदिरों से जुड़ा होता है तो फिर सिब्बल के सुर क्यों बदल जाते हैं, ये सवाल पूरा हिंदुस्तान पूछ रहा है, आपको क्या लगता है सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल अपनी दलीलों से वक्फ संशोधन कानून पर रोक लगवाने में कामयाब हो पाएंगे, या जज साहब ने जिस हिसाब से पहले भी और अब भी सिब्बल की दलीलों पर टिप्पणी की है, उससे कहानी कुछ और होने वाली है.