नई दिल्ली: भीड़ नियंत्रण और दंगों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पैलेट गन (12-गेज पंप-एक्शन शॉटगन) को गैर-घातक (Non-Lethal या Less-Lethal) हथियारों की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से होने वाले गहरे जख्मों, आंखों की रोशनी जाने और शरीर के अंदर छर्रे धंसने के मामलों के कारण यह हमेशा से विवादों में रही है।
पैलेट गन की तकनीकी खासियत और मारक क्षमता
सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग की जाने वाली पैलेट गन आम एयर गन से पूरी तरह अलग होती है। इसके कारतूस और मारक क्षमता के प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:
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एक कारतूस में 500 से 600 छर्रे: जब पैलेट गन से फायर किया जाता है, तो इसके single cartridge से सीसे (Lead) या लोहे के बने लगभग 500 से 600 छोटे छर्रे एक साथ बाहर निकलते हैं।
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1000 फीट प्रति सेकंड की रफ्तार: गन से निकलने के बाद ये छर्रे लगभग 900 से 1000 फीट प्रति सेकंड की बेतहाशा स्पीड से आगे बढ़ते हैं।
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विस्फोटक घेरा (Wide Spread): बंदूक से निकलते ही ये छर्रे किसी एक निशाने पर लगने के बजाय हवा में एक बड़ा दायरा (Area Cover) बना लेते हैं, जिससे सामने खड़े कई लोग एक साथ इसकी चपेट में आ जाते हैं।
कितनी घातक हो सकती है पैलेट गन?
नियमों के मुताबिक, पैलेट गन का इस्तेमाल हमेशा कमर के नीचे (पैरों पर) निशाना साधकर करने की हिदायत दी जाती है ताकि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया जा सके। लेकिन भीड़ के अचानक झुकने या करीब से फायर होने पर यदि छर्रे चेहरे, गर्दन या आंखों पर लगते हैं, तो:
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आंखों की रोशनी जाना: छर्रे इतने बारीक और तेज होते हैं कि आंख की पुतली को भेदकर अंदर चले जाते हैं, जिससे स्थायी अंधापन हो सकता है।
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सॉफ्ट टिश्यू डैमेज: त्वचा और मांसपेशियों के गहरे अंदर धंसने के कारण इंफेक्शन और अत्यधिक ब्लीडिंग का खतरा रहता है।
दिल्ली प्रदर्शन पर विवाद
CJP प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके एक कार्यकर्ता के चेहरे व गर्दन में छर्रे धंसे हैं। वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर 'Fake News Alert' जारी कर स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों पर किसी भी तरह की पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया है और पुलिस बल के पास ऐसी गन तैनात ही नहीं थी।
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