Uniform Civil Code: उत्तराखंड में UCC लागू करने का आखिरी पड़ाव, जानें कब तक होगा लागू?

Global Bharat 09 Oct 2024 04:33: PM 2 Mins
Uniform Civil Code: उत्तराखंड में UCC लागू करने का आखिरी पड़ाव, जानें कब तक होगा लागू?

उत्तराखंड विधानसभा ने इस साल फरवरी में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल को पास किया. इसके बाद राज्य ने कार्यान्वयन समिति का गठन किया, जिसने UCC के कार्यान्वयन ढांचे को लगभग पूरी तरह से तैयार कर लिया है. राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को जनकेंद्रित बनाने की कोशिश की गई है. उत्तराखंड समान नागरिक संहिता प्रारूप समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी है.

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उत्तराखंड सरकार ने इस साल 6 फरवरी को UCC विधेयक पेश किया था. 7 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा में विधेयक पारित किया गया, जो धामी के अनुसार उत्तराखंड के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन था. 7 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जिसे सीएम धामी ने पेश किया.

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समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक भारत में सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों के लिए समान नियम स्थापित करने का एक प्रस्ताव था. इन मामलों में विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति के अधिकार शामिल हैं. यूसीसी सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगी, चाहे उनका धर्म, लिंग या यौन अभिविन्यास कुछ भी हो. इससे पहले 29 फरवरी को उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए विधेयक को राष्ट्रपति मुर्मू के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा था.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 13 मार्च को उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी, जिससे उत्तराखंड UCC को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. धामी ने आगे विकास और पर्यावरण दोनों को संतुलित करने के लिए किए जा रहे काम और राज्य के सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) की दिशा में आगे बढ़ने के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर काम किया जा रहा है.

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सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) की दिशा में राज्य आगे बढ़ा है उन्होंने आगे कहा कि जल, भूमि, वन और वायु को शामिल करके जीईपी सूचकांक बनाया गया है. उन्होंने कहा कि जल, भूमि, वन और वायु को शामिल करके जीईपी सूचकांक बनाया गया है. राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के शहरों की वहन क्षमता का आकलन किया जा रहा है, वहन क्षमता के अनुसार ही उनका नियोजित विकास किया जाएगा.

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