कौन हैं दद्दू प्रसाद, कभी मायावती के थे बेहद खास, फिर ‘बहनजी’ पर लगाए गंभीर आरोप, अब बने अखिलेश के साथी

Rahul Jadaun 07 Apr 2025 01:06: PM 2 Mins
कौन हैं दद्दू प्रसाद, कभी मायावती के थे बेहद खास, फिर ‘बहनजी’ पर लगाए गंभीर आरोप, अब बने अखिलेश के साथी

लखनऊ: 2027 की चुनावी तैयारियां अखिलेश यादव ने अभी से शुरू कर दी हैं, और इस सियासी रण को जीतने के लिए वो PDA के फॉर्मूले पर तेजी से काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में अखिलेश ने मायावती को एक और बड़ा झटका दिया है. कभी मायावती के बेहद खास रहे दद्दू प्रसाद अब अखिलेश के साथी बन रहे हैं. दद्दू प्रसाद ही वो नेता हैं जिन्होंने मायावती के खिलाफ सबसे बड़ी बगावत की थी. तो क्या थी वो बगावत और क्यों हुई थी पढ़िए.

मायावती के खिलाफ क्यों गए थे दद्दू प्रसाद?

करीब 10 साल पहले बसपा के कुछ बड़े नेताओं ने मायावती पर पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप लगाए थे. ये आरोप लगाने वाला नेता कोई और नहीं बल्कि खुद दद्दू प्रसाद ही थे. हालांकि द्ददू कभी मायावती की कोर टीम के बेहद अहम सदस्य माने जाते थे. लेकिन 10 साल पहले 2025 में अचानक बसपा से दद्दू को निष्कासित कर दिया जाता है. जिस पर वो खुद खुलासा करते हुए मायावती पर आरोपों की झड़ी लगाते हैं. दद्दू ने कहा था कि- 27 जनवरी को मेरे पास मायावती का फोन आया था. फोन पर बसपा सुप्रीमो ने दि‍ल्‍ली चुनाव में जुटने को कहा था. इस दौरान फोन पर जब उन्‍होंने पार्टी में टि‍कट के लि‍ए पैसे लिए जाने की शि‍कायत की तो मायावती भड़क गईं. उन्‍होंने मुझे फोन पर ही कहा, तुम्‍हारा दि‍माग बि‍गड़ गया है. अब तुम्‍हें बाहर नि‍कालना होगा.

टिकट के लिए 1 से 10 करोड़ लेती हैं मायावती

दद्दू प्रसाद ने बताया था कि इसके बाद अगले ही दिन दद्दू प्रसाद को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. इस दौरान उन्होंने आरोप भी लगाए थे कि मायावती एक टिकट के बदले 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक लेती हैं. इसके साथ ही उन्होंने 22 सितंबर 2014 को स्वामी प्रसाद मौर्य को निकालने की वजह भी बताई थी. दद्दू का कहना था कि मायावती ने स्वामी प्रसाद का टिकट इस लिए काट दिया था क्योंकि अंधवि‍श्‍वास, पाखंड और अवैज्ञानि‍कता के खि‍लाफ बोला था.

अब अखिलेश के साथ आए दद्दू प्रसाद

अखिलेश यादव 2027 के सियासी समर के लिए कमर कस चुके हैं. वो हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहते हैं. यही वजह है कि अखिलेश ने अभी से चुनावी रणनीति बना कर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है. 2027 के लिए अखिलेश यादव की सबसे बड़ी रणनीति PDA(पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का समीकरण ही है. और इसी लिए अखिलेश ने दद्दू प्रसाद को अपने साथ लिया है. अगर सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में और भी कई बड़े दलित नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.

बसपा के ये नेता हो चुके हैं सपा में शामिल

इससे पहले भी बसपा के कई बड़े नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. अखिलेश यादव खुद इन नेताओं को सपा ज्वाइन करा रहे हैं. कभी बसपा में रहे बाबू सिंह कुशवाहा, इंद्रजीत सरोज, लाल जी वर्मा जैसे नेता अब अखिलेश की साईकल पर सवार हो चुके हैं. लेकिन राजनीति के रणनीतिकारों का मानना है कि बसपा नेताओं का सपा में शामिल होने का सिलसिला यहीं सीमित नहीं रहेगा, जल्द ही और भी नेता सपा में शामिल हो सकते हैं.

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