भारत का मोस्ट वांटेड दुश्मन अमृतपाल भी अब जज साहब से बाहर आने की मांग कर रहा है और पूछ रहा है कि जब केजरीवाल बाहर आ सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? बस फर्क इतना है कि अमृतपाल पर NSA लगा है और केजरीवाल पर अभी ऐसी कोई धारा नहीं है! ये जस्टिस खन्ना कौन हैं, जिन्होंने चुनाव के बीच में केजरीवाल को अग्रिम जमानत दे दी है. वहीं केजरीवाल बाहर निकलते ही मोदी से पंगा लेने लगते हैं.
क्या सबकुछ सुनियोजित है और सबको सबकुछ पता है? ED ने यही कहा था जज साहब चुनाव में आप एक ऐसे अभियुक्त को जमानत दे रहे हैं, जो चुनाव प्रभावित कर सकता है या और हुआ भी कुछ ऐसा, तो सवाल उठता है वो जज साहब कौन हैं, जिन्होंने केजरीवाल को जमानत दी और क्या वो अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन सकते हैं?
जस्टिस खन्ना की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं. ऐसे में सीजेआई चंद्रचूड़ की रिटायरमेंट के बाद वह अगले चीफ जस्टिस बनने की कतार में सबसे आगे हैं. सीजेआई चंद्रचूड़ का कार्यकाल नवंबर 2024 को पूरा हो रहा है, जिसके बाद जस्टिस खन्ना 10 नवंबर 2024 से 13 मई 2025 तक सीजेआई के रूप में काम करेंगे…जस्टिस संजीव खन्ना करीब पांच साल पहले जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बने थे.
कहते हैं इंसान का वर्तमान उसके अतीत से जुड़ा होता है, केजरीवाल को जमानत देने वाले दो जज थे, लेकिन जस्टिस संजीव खन्ना की कहानी ख़ास हैं. इनके एक रिश्तेदार भी कभी सुप्रीम कोर्ट के जज हुआ करते थे. नाम था जस्टिस हंसराज खन्ना जिन्होंने आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से इस्तीफा दे दिया था. तो क्या केजरीवाल को जमानत देने वाले जस्टिस खन्ना भी क्रांतिकारी हैं? केजरीवाल फिलहाल दिल्ली के सीएम हैं और जस्टिस खन्ना का दिल्ली से पुराना नाता रहा है!
जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. वर्ष 1983 में उन्होंने दिल्ली की जिला अदालत में प्रैक्टिस शुरू की और फिर दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल्स में वकालत की. उन्होंने संवैधानिक कानून, डायरेक्ट टैक्स, मध्यस्थता और कमर्शियल मामलों, कंपनी लॉ, भूमि कानून, पर्यावरण और प्रदूषण कानून एवं चिकित्सीय लापरवाही से जुड़े केस में वकालत की है.
केजरीवाल भी IRS थे और जस्टिस खन्ना को भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में काफी अनुभव रहा है. वहीं टैक्सेशन के मामलों में जस्टिस खन्ना की काफी महारत हासिल मानी जाती है और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में सात साल तक काम किया.
हाल ही में जज साहब ने VVPT से जुड़ी एक याचिका को ख़ारिज कर देते है. उन्होंने अपने फैसले में ईवीएम की पवित्रता और देश के चुनाव आयोग पर भरोसे को लेकर विस्तार से लिखा है. मार्च में जस्टिस खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए रोक लगाना सही नहीं है.
हालांकि अदालत ने जल्दबाजी में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी सरकार की आलोचना की. जस्टिस खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने मार्च 2023 में शराब नीति मामले में बीआरएस नेता और तेलंगाना एमएलसी के कविता को जमानत देने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कविता से ट्रायल कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करने और सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आने को कहा था.
साफ हैं कि जज साहब के ऊपर सवाल उठाने वाले लोग उनकी छवि नहीं जानते हैं. उनका इतिहास दावा करता है कि वो न तो सरकार देखते हैं, ना ही चेहरा देखकर फैसला करते हैं. बाहर निकलते ही केजरीवाल ने रैली में जज साहब का शुक्रिया किया था, पर गलतफहमी ना पालें, शुक्रिया भारी पड़ जाएगा.