नई दिल्ली: राजा भैया के गढ़ में साइकिल की रफ्तार क्या 2027 में बढ़ने वाली है, और राजा भैया को झटका लगने वाला है, या फिर कुंडा में कुंडी लगाने का अखिलेश का सपना एक बार फिर टूटने वाला है...उनकी ही पार्टी के नेता गुलशन यादव पर पुलिस ने शिकंजा कसा तो इस बार अखिलेश कुंडा में एक महिला नेता को उतारने की तैयारी है...ऐसी ख़बरें हैं कि वहां से ज्योत्सना सिंह को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है...जिसे लेकर लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ये ज्योत्सना सिंह हैं कौन, जो चुनावी मैदान में 7 बार के विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया को टक्कर देंगी...
कौन हैं ज्योत्सना सिंह
यानि ज्योत्सना सिंह को सियासत विरासत में मिली है, सपा सांसद प्रिया सरोज से इनकी अच्छी दोस्ती है...प्रतापगढ़ में गुलशना यादव के जेल जाने के बाद सपा के पास कोई बड़ा चेहरा फिलहाल नजर नहीं आत..ऐसे में महिला वोटबैंक को साधने और वहां सपा को मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव ज्योत्सना सिंह को टिकट देना का दांव चल सकते हैं...ऐसा ही इशारा इन्होंने पार्टी मीटिंग में किया भी है, जिसका दावा कई मीडिया रिपोर्ट में किया जा रहा है...पर सवाल उठता है क्या ज्योत्सना सिंह राजा भैया को टक्कर दे पाएंगे..इसे समझने के लिए साल 2022 के विधानसभा चुनाव के समीकऱण को समझना होगा...
इस वोटबैंक का तोड़ ढूंढना सपा के लिए मुश्किल होगा, क्योंकि सामने उम्मीदवार चाहे कोई भी हो, किसी भी बैकग्राउंड से हो, राजा भैया के खिलाफ चाहे जो भी प्रचार कर ले, बीते 32 साल से वहां की जनता रघुराज प्रताप सिंह को ही जीताकर सदन पहुंचा रही है...यहां तक कि मायावती जब यूपी की सत्ता में आईं, और उन्होंने राजा भैया को जेल में डाला, तब भी वो ये सिलसिला तोड़ नहीं पाईं थीं...तो क्या ज्योत्सना सिंह राजा भैया के गढ़ में सपा का परचम लहरा पाएंगी, ये अभी से नहीं कहा जा सकता...अखिलेश यादव ज्योत्सना पर ही भरोसा क्यों जता रहे हैं, इसके पत्ते खुलने अभी बाकी है, चुनावी ऐलान के बाद, जब टिकटों का बंटवारा होगा तब इसकी कहानी शायद खुलकर सामने आए...फिलहाल आपको क्या लगता है, अपनी राय जरूर दें..