कौन है लक्ष्मण बाग जिसने नवीन पटनायक को हराकर रच दिया इतिहास

Global Bharat 07 Jun 2024 09:24: PM 3 Mins
कौन है लक्ष्मण बाग जिसने नवीन पटनायक को हराकर रच दिया इतिहास

लोसकभा चुनाव के साथ-साथ ओडिशा में हुए विधानसभा चुनाव की चर्चा भी हर किसी की जुबान पर है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा है उस प्रत्याशी की जिसने ओडिशा के नवीन पटनायक को हरा दिया, जिन्हें चुनावी राजनीति में अजेय माना जाता था. तो कौन है वो प्रत्याशी जिसकी जीत ने नया इतिहास रच दिया. हर किसी के जुबान पर इस समय नवीन पटनायक को हराने वाले लक्ष्मण बाग का नाम है. सिर्फ ओडिशा ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता इनके बारे में जानना चाहती है. क्योंकि इन नतीजों ने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं.

लोकसभा चुनाव और ओडिशा विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ओडिशा से एक तस्वीर आई थी. जिसने बता दिया था कि अब नवीन पटनायक सरकार चलाने की स्थिति में नहीं हैं. उनके कंपकपाते हाथों को छुपाने की खूब कोशिश हुई लेकिन नाकाम साबित हुई है. क्योंकि कहते हैं न इंसान की नज़र से भले ही छिप जाए लेकिन कैमरे की नज़र कुछ नहीं छिपता. यही हुआ पटनायक के साथ भी जनता ने देख लिया कि अब पटनायक उस स्थिति में नहीं है कि सरकार चला सकें.

ये संदेश चला गया कि पटनायक सिर्फ चेहरा रहेंगे सरकार पीछे से कोई और चलाएगा. इसलिए जनता ने अपना मूड बदला और अपना फैसला बीजू जनता दल और खासकर नवीन पटनायक को सुना दिया. लगभग ढाई दशकों से यहां की राजनीति में छायी रहने वाली बीजू जनता दल सत्ता से बाहर हो गई. नवीन पटनायक पिछले 24 साल से ओडिशा के मुख्यमंत्री थे. उनके नाम सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड दर्ज है. नवीन पटनायक, 1998 में अस्का संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 11वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद से कभी चुनाव नहीं हारे थे.

लेकिन इस बार सभी की नज़रें ओडिशा के नतीजों पर थीं. खासकर कांताबांजी पर क्योंकि यहां से उम्मीदवार खुद नवीन पटनायक थे, जिन्हें पहली हार का सामना करना पड़ा. उन्हें हराया भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण बाग ने. ऐसे में हर कोई इस नेता के बारे में जानना चाहता है तो आपको बता दें कि लक्ष्मण बाग 15 साल पहले तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे. लक्ष्मण बाग को 90,878 वोट मिले, जबकि पटनायक को 74,532 वोट मिले. लक्ष्मण बाग की जीत का अंतर 16,344 वोट का रहा.

पटनायक के प्रभाव को देखते हुए यह हार और इसका अंतर अकल्पनीय है. लक्ष्मण बाग का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था, जो गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहा था. वे छह भाई-बहन थे. घर चलाने के लिए उन्होंने अपने परिवार के खेत पर काम किया. मामूली तनख्वाह पर एक ट्रक ड्राइवर के लिए हेल्पर का काम किया. पैसा कमाने के लिए लक्ष्मण बाग दिहाड़ी मजदूर तक बन गए. हालांकि उनके बारे में ऐसी अफवाह थी कि वह दूसरे राज्यों में लेबर भेजने के एजेंटों के लिए काम करते थे. लेकिन यह बात कभी साबित नहीं हो सकी.

बाद में उन्होंने ट्रक खरीदा और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में सफल रहे. पिछले साल दाखिल किए गए इन्कम टैक्स रिटर्न में उन्होंने अपनी आय 4.89 लाख रुपये दिखाई है. अब इनके राजनीतिक सफर के बारे में बात करते हैं. तो लक्ष्मण बाग ने राजनीति में पहला कदम 2014 के विधानसभा चुनाव में रखा. तब वह तीसरे स्थान पर रहे थे. 2019 के विधानसभा चुनाव में वह महज 128 वोटों से हार गए. पटनायक की उम्मीदवारी की घोषणा करने से बहुत पहले, भाजपा उम्मीदवार ने पहले ही जमीनी कार्य कर लिया था और लगभग हर गांव का दौरा किया था, जिससे उन्हें फायदा हुआ. 48 वर्षीय बाग की जीत सिर्फ एक चुनावी उलटफेर से कहीं ज्यादा थी.

ओडिशा विधानसभा के नतीजों पर वापस आते हैं तो इस बार यहां बीजेपी ने बहुमत हासिल किया है. जानकारों का कहना है कि ओडिशा में मोदी की रैली ने वहां की हवा को बदल दिया. 146 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 78 सीटें हासिल की हैं, जिससे उसे पहली बार ओडिशा में सरकार बनाने का मौका है. बहुमत के लिए उसे 74 सीटों की दरकार थी. बीजेडी 51 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. बीजेडी यहां मार्च 2000 से सत्ता में थी. कांग्रेस ने 14 सीटें जीतीं जबकि चार सीटें अन्य के खाते में गईं.

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