यूपी में एक सवाल लोगों की जुबान पर छाया है योगी के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. जैसे मोदी के बाद दिल्ली में कौन, वैसे ही योगी के बाद यूपी में कौन वाला सवाल सियासी गलियारे में छाया हुआ है और इसका जवाब भी अब एक बड़े बीजेपी नेता ने दे दिया है. यह बात उन्होंने बंद कमरे की किसी मीटिंग में नहीं कही है, बल्कि उनका एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके हवाले से कहा जा रहा है कि मोदी के सबसे खास अधिकारी को यूपी की कमान मिलने वाली है.
कैसरगंज लोकसभा सीट पर अपने बेटे के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मंच से साफ कहा मैं यूपी के यशस्वी मुख्यमंत्री एके शर्मा जी का स्वागत करता हूं. कायदे से ये बात जुबान फिसलने वाली थी, गलती से कोई भी कुछ भी बोल सकता है, लेकिन योगी को यूपी से हटाए जाने का मुद्दा चूंकि केजरीवाल ने जेल से बाहऱ आते ही उछाला था, इसलिए सवाल उठने लगा कि क्या योगी की जगह एके शर्मा को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी है.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी यही सवाल पूछा कि एके शर्मा वही नेता हैं, जो कभी मोदी के खास अधिकारी हुआ करते थे. फिलहाल योगी सरकार में इनके पास ऊर्जा मंत्रालय हैं और कहा जाता है कि जिस उत्तर प्रदेश में बिजली जाने का टाइम फिक्स होता था. आने का टाइम फिक्स नहीं होता था. उस उत्तर प्रदेश को इन्होंने अपने कार्यकाल में बदलकर रख दिया.
निकाय चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक में जीत में भी इन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी. यानी सरकार से लेकर संगठन तक पर पकड़ मजबूत है. पर मुख्यमंत्री बन पाएंगे ये कहना मुश्किल है, क्योंकि पहले से ही केशव प्रसाद मौर्य जैसे नेता इस कुर्सी की दौड़ में खुद को आगे रखे हुए हैं.
कौन हैं एके शर्मा
साल 1988 बैच के IAS ऑफिसर रहे अरविंद कुमार शर्मा गुजरात कैडर में थे
ये मोदी के इतने खास हैं कि जब तक मोदी गुजरात के सीएम रहे, ये साथ रहे
नरेन्द्र मोदी ने साल 2013 तक इन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने साथ रखा
साल 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंचे तो इन्हें PMO बुला लिया
जनवरी 2021 में नौकरी से VRS लेकर इन्होंने बीजेपी की सदस्यता हासिल की
यूपी सरकार में नगर विकास और ऊर्जा मंत्रालय का जिम्मा बखूबी निभाया
यानी मोदी-शाह के खास अधिकारी में गिने जाने वाले एके शर्मा की किस्मत चमक सकती है. हालांकि बृजभूषण सिंह के बयान को अगर सिर्फ जुबान फिसलने से जोड़कर नहीं देखें तो एक बात साफ नजर आती है कि योगी को लेकर दिल्ली में कुछ तो चल रहा है. वरना सीएम योगी ये बयान क्यों देते कि पीओके 6 महीने में हासिल कर लेंगे. कायदे से तारीख निर्धारित करने वाला बयान गृहमंत्री अमित शाह या पीएम मोदी को देना चाहिए था, लेकिन यहां योगी कहते हैं कि मोदी की सरकार तीसरी बार बनाइए और पीओके को हिंदुस्तान में 6 महीने के भीतर मिला देंगे.
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि सियासत में कोई भी बयान यूं ही नहीं दिया जाता, बल्कि बड़े बयान हमेशा सोच-समकर दिलवाए जाते हैं. और अब चूंकि बृजभूषण शरण सिंह जैसे नेता के मुंह से ऐसी बात निकली है जिनपर गंभीर आरोप लगने के बाद भी पार्टी ने भरोसा नहीं छोड़ा. उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया पर बेटे को टिकट दे दिया, तो फिर सवाल उठता है कि क्या बृजभूषण की बात सच होने वाली है. ये अनुमान जो पब्लिक लंबे वक्त से लगा रही है कि योगी दिल्ली आने वाले हैं, क्या योगी के लिए दिल्ली की कुर्सी तय हो चुकी है.