हाल ही में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने कुछ नई नीतियों की घोषणा की, जिसमें IPL 2025 के लिए रिटेंशन पालिसी शामिल है. लेकिन इस सबके बीच, कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे टेस्ट मैच का हाल बेहाल हो गया है. तीन दिन का मैच बारिश और मैदान की खराब हालत के कारण बेकार चला गया. पहले दिन केवल 35 ओवर खेले गए, जबकि दूसरे दिन तो कोई खेल ही नहीं हुआ. तीसरे दिन भी, बिना बारिश के, मैदान का हाल ऐसा था कि कोई भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी.
यह स्थिति एक बड़े शर्म की बात है. भारत का क्रिकेट का सबसे महंगा बोर्ड है, जिसकी आय 2022-2023 में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक थी. लेकिन इस तरह का स्थिति दर्शाता है कि बोर्ड की प्राथमिकताएं कहीं और हैं. ग्रीन पार्क स्टेडियम, जो कि भारत का सबसे पुराना स्टेडियम है, अब तक पुराने ढांचे का उपयोग कर रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार के जनरल वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने एक दिन पहले ही इस स्टेडियम के एक स्टैंड को खतरनाक करार दिया था और दर्शकों की संख्या को घटाने की सलाह दी थी.
इस स्टेडियम की सुविधाएं भी खिलाड़ियों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, सीनियर भारतीय खिलाड़ी भविष्य में इस मैदान पर खेलने के लिए तैयार नहीं हैं. फिर सवाल उठता है कि इस तरह के हालात में ग्रीन पार्क स्टेडियम को टेस्ट मैच के लिए क्यों चुना गया? उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) को बीसीसीआई की रोटेशन नीति के तहत यह मैच दिया गया था, लेकिन क्या यह सही निर्णय था?
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला का संबंध भी UPCA से है, जिससे यह साफ़ होता है कि बोर्ड की राजनीतिक रुख भी इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पहले भी, बीसीसीआई के कई फैसले राजनीतिक कारणों से प्रभावित रहे हैं. कानपुर स्टेडियम की स्वामित्व की बात करें तो, यह उत्तर प्रदेश सरकार के खेल निदेशालय के अधीन है, लेकिन इसे UPCA को लीज पर दिया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सुधार की जिम्मेदारी खेल निदेशालय की है या UPCA की?
दरअसल क्रिकेट फैंस की नजर में, यह केवल बीसीसीआई की हार है. वे हमेशा से दर्शकों के प्रति उदासीन रहे हैं. इस तरह की स्थिति से क्रिकेट प्रेमियों का निराश होना स्वाभाविक है. चाहे मैच का परिणाम कुछ भी हो, असली हार क्रिकेट प्रेमियों की ही है, जो या तो स्टेडियम में खेल देख रहे थे या टीवी पर.
इसलिए, बीसीसीआई को अपनी प्राथमिकताओं और निर्णयों पर पुनर्विचार करना चाहिए. भारतीय क्रिकेट का स्तर बढ़ाने के लिए सुविधाओं में सुधार करना और दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाना अत्यंत आवश्यक है. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो क्रिकेट का यह प्यारा खेल अपने प्रशंसकों को खो देगा.