जलालाबाद होगा परशुराम पुरी: इस्लामिक नाम पर चला योगी कैबिनेट का हंटर, शाहजहांपुर की तहसील का बदला नाम

Rahul Jadaun 06 Jul 2026 01:39: PM 2 Mins
जलालाबाद होगा परशुराम पुरी: इस्लामिक नाम पर चला योगी कैबिनेट का हंटर, शाहजहांपुर की तहसील का बदला नाम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में एक बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके तहत शाहजहांपुर जिले की ऐतिहासिक तहसील 'जलालाबाद' का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर 'भगवान परशुराम पुरी' कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में हुई इस कैबिनेट बैठक में इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

भगवान परशुराम की जन्मस्थली से जुड़ा है इतिहास प्रशासनिक और ऐतिहासिक इनपुट्स के मुताबिक, शाहजहांपुर का जलालाबाद क्षेत्र पौराणिक काल से भगवान परशुराम की जन्मस्थली और उनकी तपोभूमि के रूप में जाना जाता रहा है। यहाँ भगवान परशुराम का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर और आश्रम भी स्थित है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि मुग़ल काल (जलालुद्दीन के नाम पर) में रखे गए 'जलालाबाद' नाम को बदलकर इसके पौराणिक और सनातन गौरव को वापस लौटाया जाए।

योगी सरकार का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और प्रशासनिक फैसला कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ताओं ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश की धरोहरों और महापुरुषों के सम्मान को अक्षुण्ण रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस मंजूरी के बाद अब राजस्व रिकॉर्ड, रेलवे स्टेशन, सरकारी दस्तावेजों और साइनबोर्ड्स पर जलालाबाद की जगह 'भगवान परशुराम पुरी' दर्ज करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल क्षेत्र के सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि यहाँ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी नए पंख लगेंगे।

विपक्ष और सियासत में उबाल योगी कैबिनेट के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर नामों को बदलने को लेकर बहस छिड़ गई है। जहां सत्तापक्ष और हिंदूवादी संगठन इसे एक ऐतिहासिक सुधार बता रहे हैं और भगवान परशुराम के सम्मान में इसे एक बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों की ओर से इसे मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति करार दिया जा रहा है। हालांकि, तमाम राजनीतिक बयानबाजी के बीच योगी सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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