नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर निर्माण और उसके चंदे को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं और 'चोरी' के आरोपों पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने विपक्षी नेताओं के दावों को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए उनसे पुख्ता सबूत पेश करने की मांग की है। इतना ही नहीं, वीएचपी ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस के DSP को एक पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
साख को ठेस पहुंचाने का आरोप
विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि विपक्षी नेताओं द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट और चंदे को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। आलोक कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि बिना किसी ठोस आधार और सबूत के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया पर कीचड़ उछाला जा रहा है। वीएचपी का आरोप है कि इस तरह के बयानों से न सिर्फ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख को ठेस पहुंचाई जा रही है, बल्कि समाज में जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस से की शिकायत, जांच की मांग
वीएचपी ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजे गए पत्र में वीएचपी ने मांग की है कि अरविंद केजरीवाल और प्रियंका गांधी द्वारा सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों की गहनता से जांच की जाए। वीएचपी का कहना है कि यदि इन नेताओं के पास चंदे में हेरफेर या 'चोरी' के वास्तविक सबूत हैं, तो वे उन्हें जांच एजेंसियों के सामने पेश करें, अन्यथा मनगढ़ंत अफवाहें फैलाने के लिए उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
विपक्ष का रुख और आगामी रणनीति
गौरतलब है कि विपक्ष लंबे समय से राम मंदिर से जुड़ी जमीनों की खरीद और चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठाता रहा है। हालांकि, वीएचपी के इस आक्रामक रुख और पुलिस में दी गई शिकायत के बाद यह मामला अब महज राजनीतिक बयानबाजी से आगे निकलकर कानूनी मोड़ लेता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और विपक्षी दलों की तरफ से इस पर क्या पलटवार आता है।