UP zero tolerance: जो उत्तर प्रदेश कभी 'लचर कानून-व्यवस्था' और 'लालफीताशाही' के भंवर में फंसा माना जाता था, आज वो 'जीरो टॉलरेंस' और 'इंस्टेंट जस्टिस' के वैश्विक मॉडल के रूप में उभर रहा है... चाहे वो सलीम वास्तिक केस हो, बदायूं की कानून-व्यवस्था हो या फिर एलपीजी की कालाबाजारी पर सर्जिकल स्ट्राइक ही क्यों ना हो. योगी सरकार ने अपराधियों को साफ संदेश दे दिया है कि अब 'इंसाफ के लिए इंतजार नहीं, बल्कि फैसला ऑन द स्पॉट होगा'.
गाजियाबाद के लोनी में जब एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक पर हमला हुआ... तो योगी सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती माना, और पुलिस ने अपराधियों को सबक सीखाया.... ये संदेश दिया कि प्रदेश में अब अपराधियों का 'रसूख' उनके काम नहीं आएगा.... इस कार्रवाई की गूंज डिजिटल गलियारों में इसलिए सुनाई दी क्योंकि जनता अब फाइलों में दबे न्याय के बजाय 'ऑन-स्पॉट' जवाबदेही देखना चाहती है। यह कानून के 'इकबाल' को पुनर्स्थापित करने वाला कदम साबित हुआ...
सलीम के हमलावरों का इंसाफ होते-होते मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ चुका था, और देश में गैस को लेकर मारामारी शुरू हो चुकी थी, इसी मुसीबत को मौका बनाने के लिए कुछ गैस माफियाओं ने गरीब की थाली पर डकैती डालने की कोशिश की... गैस की कालाबाजारी करने के लिए सिलेंडर इकट्ठे किए जाने लगे, लेकिन योगी सरकार ने एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी के खिलाफ जो चक्रव्यूह रचा, उसने भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है... इन लोगों के खिलाफ सिर्फ छापेमारी ही नहीं हुई, बल्कि दोषियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आर्थिक कमर तोड़ी गई...
इससे योगी सरकार ने संदेश दे दिया कि गरीब के हक पर डाका डालने वालों के लिए व्यवस्था में कोई सहानुभूति नहीं. इस सबके बीच बदायूं दोहरे हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को दहला कर रख दिया... ये कानून-व्यवस्था के लिए एक अग्निपरीक्षा बन गया था.. लेकिन सरकार ने अपनी 'जिम्मेदारी निभाते हुए काम की स्पीड को कम नहीं होने दिया...
बरेली मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल यानि एसआईटी का गठन किया गया. आरोपी की 6 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी हुई. शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने की खबरें आई. लगातार एक्शन से सरकार ने साफ किया है अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. अगर कोई भी अपराध करता है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी...
सोशल मीडिया के इस दौर में योगी सरकार ने सोशल मीडिया को ही अपनी ताकत बनाया.. उसे 'चेहरा' और 'आवाज' दी है. योगी सरकार की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि वह सोशल मीडिया पर उठने वाली शिकायतों और चर्चाओं को केवल 'ट्रेंड' नहीं मानती, बल्कि उन्हें 'फीडबैक' की तरह लेती है. पुलिस और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के हैंडल्स जिस तरह से शिकायतों पर जवाब देते हैं... 'जमीन पर एक्शन और डिजिटल माध्यम पर जवाबदेही' ने एक ऐसा सुरक्षा कवच बनाया है जहाँ अपराधी भयभीत है और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करता है...
सीएम योगी आदित्यनाथ के इन्हीं कदमों ने उत्तर प्रदेश को एक आधुनिक शासन की नजीर बना डाला है... क्योंकि जब नेतृत्व में इच्छाशक्ति और प्रशासन में स्पष्टता होती है, तब 'न्याय' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जनता का 'विश्वास' बन जाता है... उत्तर प्रदेश का यह 'क्विक एक्शन मोड' आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक केस स्टडी बन चुका है। यह 'कानून के राज' की वह नई परिभाषा है जहाँ अपराधी के लिए शून्य स्थान है और नागरिक के लिए सर्वोच्च सम्मान...