कहते हैं सियासत में हर तस्वीर में कोई न कोई संदेश छिपा होता है और ये दो नई तस्वीरें भी बड़े मैसेज की ओर इशारा कर रही हैं. पहली तस्वीर सीएम योगी आदित्यनाथ की है, जो दक्षिण भारत से आई पुंगनुर नस्ल की गायों को दुलार रहे हैं, उनमें से एक का नाम भवानी रखते हैं, तो दूसरे का नाम शिवा. लेकिन इसी दौरान अखिलेश यादव एक अस्तबल में पहुंच जाते हैं, वहां जाकर वो एक घोड़े के साथ फोटो क्लिक करवाते हैं, उसके बाद उसका कैप्शन देते हैं, कद में छोटा है, लेकिन लंबी रेस का घोड़ा है.

अखिलेश की इस बात पर कुछ लोग कमेंट में तारीफ लिखते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं कि क्या आपको लोकतंत्र नहीं राजतंत्र पसंद है, घोड़ा तो राजा-महाराजा रखा करते थे, घोड़े से हमारे देश में मुगल आक्रमणकारी आते थे, घोड़ा युद्ध का सबसे बड़ा संकेत देता है, तो क्या अखिलेश ये संदेश दे रहे हैं कि सीएम योगी से उनकी सियासी लड़ाई और तेज होने वाली है, क्योंकि बीते 30 दिनों में जिस तरीके से दोनों दिग्गज नेताओं ने तीन बार एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की है, वो साफ इस ओर इशारा करता है. पहले योगी कहते हैं अखिलेश माफियाओं के सरगना हैं, तो अखिलेश कहते हैं दोनों की तस्वीर लगाकर देख लो पता चल जाएगा.

योगी जैसे ही इस बात का जवाब देते हैं और कहते हैं सपा नेता में औरंगजेब की आत्मा घुस आई है, अखिलेश मठाधीश और माफिया वाली बात शुरू कर देते हैं. अब तक दोनों के बीच जुबानी जंग चल ही रही थी, तभी अखिलेश ने तस्वीरों वाला राग छेड़ दिया, योगी ने तस्वीर अपलोड की थी, तो सबको सामान्य बात लगी, क्योंकि योगी अक्सर गौसेवा की तस्वीर डालते हैं, गाय को माता मानते हैं, नवरात्रि में कन्या पूजन और गौपूजन दोनों करते हैं. लेकिन अखिलेश यादव को कभी किसी ने घोड़े की सवारी करते नहीं देखा.
हां इनकी रैलियों में एक-दो बार कुछ लोग घोड़े पर सवार होकर उनका भाषण सुनने जरूर पहुंचे, तो फिर अखिलेश तस्वीर अपलोड कर आखिर संदेश क्या देना चाहते हैं, जिन पिछड़ों और दलितों की राजनीति अखिलेश करते हैं. वहां तो गिने-चुने लोगों के पास ही पहले घोड़ा होता था, तो फिर क्या मुस्लिमों को साधने के लिए योगी ने घोड़े वाली चाल चली है, क्योंकि ये वही अखिलेश हैं, जो खुद कहते थे घोड़े की ढाई चाल से बचकर नहीं चले तो शतंरज के खेल में कभी भी मात मिल सकती है.
अखिलेश जिस हिसाब से योगी सरकार पर हमलावर हैं, एसटीएफ से लेकर बुलडोजर तक पर सवाल उठा रहे हैं, तो एक सवाल ये भी है क्या अखिलेश ने घोड़े की तस्वीर डालकर कोई ऐसी चाल चल दी है, जिसका फायदा उन्हें उपचुनाव में मिलने वाला है, क्योंकि योगी के आक्रमक बयान सुनने के बाद बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक यही कह रहे हैं कि बाबा पुराने फॉर्म में लौट चुके हैं.
अब उनकी पिच हार्ड हिंदुत्व वाली ही होगी, क्योंकि अयोध्या हारने के बाद बीजेपी को ये होश आ गया है कि योगीनीति में दम है, और योगी फिलहाल ऐसी बातें हिंदुओं को जगाने के लिए ही कर रहे हैं, क्योंकि अयोध्या के उसी मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव है, जहां की विधायकी छोड़कर सपा के अवधेश प्रसाद सांसद बने हैं, ऐसे में मिल्कीपुर जीतने के लिए बाबा ने एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है, जबकि अखिलेश अपनी करहल सीट बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि यहां बीजेपी बाजी पलटने के मूड में आ चुकी है, इसीलिए जब योगी खुलकर जूस में यूरिन पर बोलते हैं, तो वहीं अखिलेश मंगेश यादव और मोईद का पक्ष लेने लगते हैं. अब तय यूपी की 10 विधानसभा सीटों की जनता को करना है कि वो योगी का हाथ मजबूत करना चाहती है या अखिलेश की साइकिल.