कहां है जनता के हितैषी नेता, कहां हैं फोटो खींचवाने वाले अधिकारी और कहां हैं बात-बात पर जेल में डालने की धमकी देने वाले पुलिसवाले, जिनकी सड़ियल सिस्टम के आगे एक महिला कीचड़ में दंडवत प्रणाम करती है. एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर खुद की वर्दी फाड़ने लगता है और एक पुरुष शरीर पर शिकायतों की माला लटकाएं सड़कों पर रेंगने लगता है. तस्वीरें किस प्रदेश की हैं, इससे ज्यादा अहम ये है कि तस्वीरें उस हिंदुस्तान की है, जहां गरीबी हटाओं का नारा 4 दशक पहले दिया गया.
देश ने 16 प्रधानमंत्री और प्रदेश ने 18 मुख्यमंत्री देखे हैं, हर किसी ने योजनाएं भी चलाई हैं, लेकिन लकड़ी की कुर्सी पर तोंद फुलाए बैठे बाबुओं पर किसी ने ऐसी गाज नहीं गिराई कि वो घर जाकर आवेदन ले ले, समस्या का समाधान कर दे. अगर आम आदमी ही परेशान होता तो बात दब जाती, लेकिन जब एक वर्दीवाला ही गुस्से में आकर अपनी वर्दी फाड़ने लगे तो फिर सवाल शासन-प्रशासन सब पर उठने लगते हैं. इन तस्वीरों में दम तोड़ते सिस्टम का वो सच छिपा है, जिसे देखकर आप दो मिनट के लिए आंखें तो बंद कर सकते हैं, लेकिन इसे नकार नहीं सकते, जिसे देखने के बाद सीएम के आदेश पर अधिकारी दौड़े-दौड़े इनकी मदद के लिए तो पहुंच सकते हैं, लेकिन इसकी हकीकत को नकार नहीं सकते.
जो महिला आपको कीचड़ में सनी दिख रही है, वो मध्य प्रदेश के श्योपुर की है. वहां के अचार वाले इलाके में नाली और सड़क की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि थोड़ी सी बारिश में सड़क तालाब बन जाता है. लेकिन कोई अधिकारी सूध नहीं लेता, नतीजा महिला अनोखा विरोध शुरू करती है, वो कीचड़ के रास्ते पर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ती है, प्रशासन से गुहार लगाती है, पर सड़क तुरंत नहीं बन पाती, बल्कि फिर भी आश्वासन ही मिलता है कि बन जाएगी.
अब सिस्टम की पोल खोलती दूसरी तस्वीर देखिए, नीमच जिले के मुकेश प्रजापति शिकायत पत्रों की माला पहनते सड़कों पर रेंगते नजर आते हैं, ऐसा लगता है मध्य प्रदेश का वो पूरा सिस्टम सड़कों पर रेंग रहा है, जिसमें छिपे बैठे हैं गिद्ध जैसी नजरों वाले कई शिकारी, जिन्हें रिश्वत का पैसा मिले तो फाइल आगे बढ़ाएंगे, वरना काम को लंबे वक्त के लिए टरकाएंगे. ये वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल होता है, अधिकारी एक्शन में आते हैं, एसडीएम खुद शिकायत पत्र लेती हैं और आश्वासन देती हैं कि जिस पूर्व सरपंच और उसके पति के खिलाफ 7 साल से एक्शन की मांग आप कर रहे हैं, उसकी जांच होगी. अब जांच के बाद एक्शन क्या होगा, क्या वो कोई रसूखदार तय करेगा, क्योंकि तीसरी तस्वीर इसी रसूख की कहानी बताती है.
ये तस्वीर है ASI विनोद मिश्रा की, जो सिंगरौली जिले के बैढ़न थाने में पोस्टेड हैं, नाली विवाद को लेकर कुछ लोग उनके आवास पर बातचीत के लिए पहुंचते हैं. चाय-नाश्ता चल ही रहा होता है तभी पार्षद के पति अर्जुन दास गुप्ता असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर को कहते हैं, वर्दी उतरवा दूंगा, जिसे सुनते ही विनोद मिश्रा गुस्से में आकर खुद ही अपनी वर्दी फाड़ने लगते हैं, तस्वीरें वायरल होती है तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच जाता है, वर्दी का अपमान करने के आरोप में मिश्राजी की सैलरी रोक दी जाती है, बीजेपी नेता धमकी वाली बात को बेबुनियाद आरोप बताने लगते हैं. जबकि ASI मिश्रा कहते हैं भाजपा नेता अर्जुन दास गुप्ता, पड़ोसी मनोज पांडेय और हरीश चौधरी मुझसे रंजिश रखते हैं. विवाद सिर्फ घर के सामने से निकल रही सड़क और नाली को लेकर है. इसे लेकर कई बार न सिर्फ थाने में शिकायत हुई, बल्कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के पास भी शिकायत की गई थी. नगर निगम भी ये मानता है कि वहां नाली की जरूरत नहीं है, लेकिन ये लोग बेवजह दबाव बना रहे हैं.
मतलब रास्ते औऱ नाली का विवाद सिर्फ आम जनता को ही नहीं, बड़े-बड़े लोगों को भी परेशान कर रहा है, पर सवाल इस बात का है कि ऐसी तस्वीरों पर मोहन यादव एक्शन कब लेंगे, जनता को इस तरह से विरोध को मजबूर करने वाले अधिकारियों की कुर्सी पर बुलडोजर कब चलाएंगे, ये ख़बर भले ही मध्य प्रदेश की है, पर समूचे हिंदुस्तान को जगाने वाली है.