बालासोर: ओडिशा पुलिस ने बालासोर में एक कॉलेज छात्रा के आत्मदाह मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राज्य संयुक्त सचिव सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है. 20 वर्षीय छात्रा ने कॉलेज प्रशासन द्वारा एक वरिष्ठ शिक्षक के खिलाफ उसकी यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई न करने के बाद यह कठोर कदम उठाया था. पुलिस के अनुसार, ABVP नेता सुभट संदीप नायक और ज्योति प्रकाश बिस्वाल उस समय मौके पर मौजूद थे, जब फकीर मोहन स्वायत्त कॉलेज में छात्रा ने प्रिंसिपल के कार्यालय के बाहर खुद को आग लगाई. दोनों पर छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है.
सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ज्योति प्रकाश के मोबाइल से 30 मिनट लंबा वीडियो मिला है, जो आत्मदाह के वक्त का है. दोनों को गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अदालत में पेश किया गया और, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. बता दें कि 90 प्रतिशत जलने के कारण छात्रा ने 15 जुलाई को दम तोड़ दिया, जिसके बाद पूरे ओडिशा में आक्रोश फैल गया और राजनीतिक उथल-पुथल मच गई.
क्या है मामला?
पुलिस जांच के अनुसार, छात्रा ने कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) समीर रंजन साहू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उसने साहू पर यौन एहसान मांगने, शैक्षणिक नुकसान की धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि, कॉलेज प्रशासन और प्रिंसिपल दिलीप घोष ने उसकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की. छात्रा ने कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत दर्ज की थी, लेकिन प्रिंसिपल के साथ एक बैठक के बाद उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया. पुलिस का कहना है कि बैठक में उसे शर्मिंदा किया गया और शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया. परिवार ने FIR में दावा किया कि प्रिंसिपल ने छात्रा को कहा था कि अगर उसने आरोप वापस नहीं लिए तो उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
जांच में क्या सामने आया?
जांच में पता चला कि HOD साहू ने छात्रा के खिलाफ कुछ छात्रों को भड़काया था ताकि प्रशासन उस पर कार्रवाई करे. प्रिंसिपल और HOD को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्हें उनके पदों से निलंबित कर दिया गया है. उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने, यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं. इस घटना ने ओडिशा में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है और इसे मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाया है. सामाजिक संगठनों की ओर से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.