मध्य प्रदेश के विदिशा में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान रैली को संबोधित कर रहे थे. वक्त शाम के करीब 5 बजे का था, तभी सायरन बजाते हुए पुलिस की एक गाड़ी आती है. दारोगाजी उतरते हैं, माइक बंद करने का आदेश देते हैं, कहते हैं रैली रोको, टाइम हो गया और इतना कहते ही हंगामा खड़ा हो जाता है.
खुद शिवराज सिंह चौहान कुछ नहीं बोलते पर उनके साथ खड़े राज्य के पूर्व मंत्री और विधायक सुरेन्द्र पटवा सीधा दारोगाजी को ही धमकाने लगते हैं और कहते हैं ऐसी जगह फिकवाऊंगा कि याद रखोगे.
बाद में विधायकजी को जब एहसास होता है कि हमने ऐसा बोलकर ठीक नहीं किया, दारोगाजी तो बस ड्यूटी का पालन कर रहे थे और कह रहे थे आदर्श चुनावी आचार संहिता के मुताबिक तय समय के बाद प्रचार नहीं कर सकते तो एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहते हैं. ‘‘शिवराज जी के भाषण के दौरान माइक बंद कर दिया गया था और उन्होंने केवल उसे दोबारा चालू करने को कहा था. शिवराज जी का भाषण खत्म होने में सात मिनट बाकी थे और मैं साउंड सिस्टम के लिए जिम्मेदार लोगों पर चिल्ला रहे थे ना कि पुलिस अधिकारी पर.’’
हालांकि मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायकजी के इस बयान को सिर्फ सफाई बता रही है, सुरेन्द्र सिंह पटवा ने जिस तरह से थाना प्रभारी महेन्द्र सिंह ठाकुर को धमकाया वो ठीक नहीं है.
मंडीदीप पुलिस क्षेत्र की ये कहानी अब पूरे मध्य प्रदेश में वायरल है, और पुराने लोग वो किस्सा याद कर रहे हैं जब 7 अप्रैल 2004 को पटना में प्रचार कर रहे लालकृष्ण आडवाणी की रैली एक IAS अधिकारी ने रुकवा दी थी. चुनाव आयोग का साफ आदेश था कि रात 10 बजे के बाद कोई भी रैली नहीं होगी. जैसे ही घड़ी में दस बजे IAS गौतम गोस्वामी मंच पर पहुंचे और तब के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को कहा Your Time IS over सर. उस वक्त मंच पर सुशील मोदी, नीतीश कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कई दिग्गज नेता मौजूद थे.