नई दिल्ली, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित दिव्य कला मेला 2024 का भव्य शुभारंभ आज नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर हुआ. 12 दिसंबर से 22 दिसंबर 2024 तक चलने वाले इस मेले का यह 22वां संस्करण है.
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किया. इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले, छत्तीसगढ़ के सांसद भोजराज नाग , दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल, और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे.

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर समावेशिता और सशक्तिकरण के प्रतीक "दिव्य कला मेला" का उद्घाटन किया था. इस आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से दिव्यांग उद्यमियों और शिल्पकारों ने अपनी रचनात्मकता और उद्यमिता का प्रदर्शन किया. इस मेले की अपार सफलता ने इसे देश के अन्य हिस्सों में आयोजित करने की हमें प्रेरणा दी. आज दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर इसका 22वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है.
डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन विभाग दिव्यांग बंधुओं और युवक-युवतियों के चहुमुखी विकास और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में दिव्यांगजनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जब एक दिव्यांग व्यक्ति सशक्त होता है, तो वह अपने परिवार, समाज और देश को भी सशक्त करने का कार्य करता है.
दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से विभाग द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में दिव्य कला मेला आयोजित किया जा रहा है. इससे उन्हें अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए एक राष्ट्रीय मंच मिलता है. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए खूबसूरत और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को खरीदकर उनको प्रोत्साहित करें.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक व्यापक मंच है. उन्होंने यह भी कहा कि हमारे दिव्यांग बंधु हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, जो हम सभी के लिए गौरव की बात है. राज्य मंत्री डॉ. रामदास अठावले ने दिव्यांगजनों की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए कहा कि यह मेला उनके उत्पादों के लिए एक मंच प्रदान करता है.
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने दिव्य कला मेले को सशक्त दिव्यांग उद्यमिता का अनुपम उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि आज कई दिव्यांग उद्यमी विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने विशेष शिक्षकों से आग्रह किया कि वे दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता के प्रति जागरूक करें, ताकि वे भविष्य में सफल उद्यमी बन सकें.

दिव्य कला मेला की मुख्य विशेषताएं
1. दिव्यांगजनों के उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री:
आगंतुकों को हस्तशिल्प, हस्तकरघा, पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद, घर की सजावट, पैकेज्ड फूड, खिलौने, आभूषण, और क्लच बैग जैसे अनोखे उत्पादों को खरीदने का अवसर मिलेगा.
2. सांस्कृतिक कार्यक्रम:
प्रतिदिन संध्याकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें दिव्यांग और सामान्य कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी.
अंतिम दिन, 22 दिसंबर 2024 को, "दिव्य कला शक्ति" नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दिव्यांग कलाकार "दिव्यांगता में क्षमता" विषय पर अपनी अद्वितीय कला का प्रदर्शन करेंगे.
भागीदारी और उद्देश्य
इस मेले में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 100 दिव्यांग उद्यमी और कारीगर भाग ले रहे हैं. यह मेला दिव्यांगजनों की प्रतिभा, दृढ़ता, और कौशल को प्रदर्शित करने का मंच है. यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है, बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में एक और कदम है