झारखंड में HIV संक्रमितों की संख्या हर रोज बढ़ रही है। world AIDS Day (एक दिसंबर) के पहले झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी की ओर से जारी आंकड़ा बताता है कि राज्य में हर रोज औसतन सात HIV संक्रमितों की पहचान हो रही है। इस साल एक अप्रैल से अक्टूबर के अंत तक यानी सात महीने में राज्य में 1542 नए HIV पॉजिटिव मरीजों की पहचान हुई है। इनमें आठ नवजात भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सात महीने में राज्य में कुल 6 लाख 56 हजार लोगों की स्क्रीनिंग से यह आंकड़ा सामने आया है।
सबसे ज्यादा 203 HIV संक्रमितों की पहचान रांची में की गई है, जबकि पूर्वी सिंहभूम में 194, हजारीबाग में 149 और धनबाद जिले में 124 HIV मरीज पाए गए हैं। गढ़वा जिले में एक भी HIV संक्रमित नहीं पाया गया, जबकि लोहरदगा में चार और सिमडेगा एवं चतरा जिले में आठ-आठ मरीजों की पहचान हुई है। पिछले साल राज्य में कुल 12 लाख से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग के बाद 2074 HIV संक्रमितों की पहचान हुई थी।
HIV संक्रमितों के इलाज के लिए राज्य में कुल 14 एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट) सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर उन्हें निःशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। रांची के रिम्स स्थित एआरटी सेंटर में सबसे ज्यादा करीब 1600 HIV मरीज हर माह दवा लेते हैं। राज्य में HIV संक्रमण के 90 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों में यह पाया गया है कि रोजगार के सिलसिले में बाहर के प्रदेशों में लंबे समय तक रहने वाले लोग संक्रमण लेकर लौट रहे हैं।
इनमें निम्न आय वर्ग के लोगों की संख्या ज्यादा है। ऐसे सैकड़ों केस हैं जिसमें ट्रक ड्राइवर और प्रवासी मजदूर बाहर से संक्रमण लेकर आए। झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी का दावा है कि मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग और काउंसलिंग की जा रही है। गर्भवती महिलाओं की HIV जांच अनिवार्य तौर पर कराई जा रही है, ताकि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं से बच्चों में एड्स के संक्रमण को रोका जा सके। पिछले एक साल में जिन HIV पॉजिटिव मरीजों की पहचान हुई है, उनमें 198 गर्भवती महिलाएं भी हैं।
सोसाइटी उन लोगों को ही एक्टिव संक्रमित मानता है, जो एआरटी सेंटरों में पहुंचकर जांच कराते हैं। एड्स और HIV संक्रमितों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्हें अंत्योदय अन्न योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन से भी जोड़ा गया है।