नई दिल्ली: डायबिटीज से जूझ रहे करोड़ों भारतीयों के लिए अब सुबह-शाम इंसुलिन की सुई लगाने का बोझ कम होने वाला है. डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में दुनिया का पहला और इकलौता एक हफ्ते में सिर्फ एक बार लेने वाला बेसल इंसुलिन Awiqli (अविकली) लॉन्च कर दिया है.
यह नई थेरेपी टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए उपलब्ध होगी. कंपनी का दावा है कि इससे इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा रोजाना सुई लगाने का डर काफी हद तक दूर हो जाएगी.
कीमत और उपलब्धता
भारत में डायबिटीज की भारी मार
भारत में 10.1 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ प्री-डायबिटीज की चपेट में हैं. कंपनी के अनुसार, इंसुलिन शुरू करने में औसतन 7-9 साल की देरी होती है, मुख्य रूप से सुई के डर, दर्द और खर्च के कारण. फिलहाल देश में करीब 60 लाख लोग इंसुलिन ले रहे हैं, जिसकी संख्या जल्द ही 90 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है.
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिय ने कहा कि Awiqli मरीजों के जीवन को आसान बनाएगा और इंसुलिन थेरेपी को ज्यादा स्वीकार्य बनाएगा. यह लॉन्च सैनोफी के लैंटस और कई भारतीय कंपनियों (बायोकॉन, ल्यूपिन आदि) के रोजाना वाले इंसुलिन प्रोडक्ट्स से सीधा मुकाबला करेगा.