नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने हंतावायरस संक्रमण को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) की सिफारिश और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आकलन के आधार पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. यह फैसला क्रूज शिप एमवी होंडियस पर आए मामलों के बाद लिया गया.
जहाज पर क्या हुआ?
जहाज पर हंतावायरस के कुल 8 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें से 5 की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई. इस संक्रमण से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. WHO को इस घटना की जानकारी मई के पहले सप्ताह में दी गई थी. WHO के अनुसार, यह संक्रमण अंडेस स्ट्रेन का हंतावायरस है.
इसमें इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता बहुत सीमित है और ज्यादातर लंबे समय तक नजदीकी संपर्क में रहने पर ही फैलता है. फिलहाल विश्व स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को कम (Low) माना गया है. जहाज पर सवार दो भारतीय नागरिक फिलहाल स्वस्थ हैं और कोई लक्षण नहीं दिखा रहे हैं. उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में रखा गया है.
सरकार ने उठाए कदम...
भारत में कितना खतरा?
हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत कम होता है, इसलिए इसके बड़े पैमाने पर फैलने या महामारी बनने की संभावना नगण्य है. भारत में इस वायरस से जुड़े कोई बड़े या आधिकारिक रूप से पुष्टि किए गए प्रकोप की खबर नहीं है. विश्व स्तर पर भी यह संक्रमण दुर्लभ माना जाता है. फिलहाल इसका कोई खास टीका या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में संक्रमण ज्यादातर स्थानीय स्तर पर रहकर खुद सीमित हो जाता है.