लखनऊ : सोशल मीडिया पर इन दिनों फर्जी पोस्ट और गलत सूचनाओं को लेकर बहस तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर हाल ही में एक फर्जी पोस्ट वायरल किया गया, जिसमें दावा किया गया कि वह एक नाइजीरियन मुस्लिम युवक के साथ भाग गई हैं. बाद में इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने इसे भ्रामक और मनगढ़ंत बताया तथा कार्रवाई की मांग की. दरअसल, तह पोस्ट एआई से बनाया गया था.
इसी बीच प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर का नाम भी चर्चा में आ गया. सोशल मीडिया पर उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर कुछ कथित फर्जी पोस्ट साझा किए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद यह बहस और तेज हो गई कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों, खासकर महिलाओं, को निशाना बनाकर झूठी कहानियां और भ्रामक दावे क्यों फैलाए जाते हैं.
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि किसी भी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए फर्जी पोस्ट, एडिटेड तस्वीरें और अपुष्ट दावों का इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है. कई लोगों का कहना है कि अदिति यादव और मैथिली ठाकुर से जुड़े मामलों ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फेक कंटेंट के बढ़ते चलन को उजागर कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है, ताकि अफवाहों और दुष्प्रचार को बढ़ावा न मिले.