नई दिल्ली: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऑनलाइन एस्कॉर्ट सर्विस रैकेट का भंडाफोड़ किया है और लगभग 120 इंस्टाग्राम हैंडल्स, फेसबुक पेजेस तथा वेबसाइट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ये सभी कथित तौर पर एस्कॉर्ट से जुड़ी गतिविधियों और ऑनलाइन ठगी में शामिल थे. अधिकारियों के अनुसार, इन सोशल मीडिया प्रोफाइल्स का इस्तेमाल महिलाओं के अश्लील वीडियो और न्यूड फोटोग्राफ्स दिखाकर ग्राहकों को लुभाने के लिए किया जा रहा था.
जांच में पता चला कि ऑपरेटर घंटे के हिसाब से या पूरी रात के लिए रेट बताते थे और UPI ID या मोबाइल नंबर के जरिए पेमेंट लेते थे, लेकिन इसके बाद ग्राहकों को ठगा जाता था. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी अजित राजियान ने कहा कि शहर में डिजिटल निगरानी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को और तेज कर दिया गया है, ताकि ऑनलाइन शोषण पर अंकुश लगाया जा सके.
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन एस्कॉर्ट और महिलाओं के डिजिटल शोषण के खिलाफ एक बड़ा अभियान चल रहा है. मॉनिटरिंग के दौरान पुलिस को पता चला कि कई अकाउंट फर्जी थे और इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स या मॉर्फ्ड इमेजेस का इस्तेमाल करके अश्लील कंटेंट बनाया जा रहा था. डीसीपी राजियान ने बताया कि कुछ प्रोफाइल्स पर महिलाओं के AI से बने न्यूड फोटो या एडिटेड तस्वीरें इस्तेमाल की जा रही थीं ताकि ग्राहक आकर्षित हों.
जब लोग इन अकाउंट्स से संपर्क करते थे, तो उन्हें शॉर्ट-टाइम या ओवरनाइट एस्कॉर्ट सर्विस ऑफर की जाती थी और तय रेट पर पेमेंट डिजिटल तरीके से लिया जाता था, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह ठगी में बदल जाता था. इन 120 प्रोफाइल्स से जुड़े एडमिनिस्ट्रेटर्स और मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं, Immoral Traffic (Prevention) Act की धारा 8 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत FIR दर्ज की गई है.
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ये गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन करती हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को अपमानजनक तरीके से पेश करके उनकी गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं. डीसीपी राजियान ने बताया कि यह केस "संवेदनशील" घोषित किया गया है ताकि पीड़ितों की गोपनीयता बनी रहे और आरोपी डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ न कर सकें.
क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान ऑनलाइन प्रोफाइल्स या संदिग्ध लिंक्स से सावधान रहें. अधिकारियों ने चेतावनी दी कि एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर अनवेरिफाइड UPI ID पर पैसे ट्रांसफर करने से अक्सर आर्थिक ठगी होती है और इससे लोग अवैध गतिविधियों में भी फंस सकते हैं. जांच अभी जारी है और रैकेट चलाने वालों तथा इससे फायदा उठाने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं.