संदीप शर्मा
क्या योगी की कुर्सी ख़तरे में है? या ये सिर्फ हवा की तरह न दिखने वाला एक बयान है? इस बार सवाल केजरीवाल ने नहीं बल्कि अखिलेश यादव ने उठाया है. उन नेताजी का नाम भी बताया जो योगी की कुर्सी लेना चाहते हैं. इसकी आंच हाथरस में भी देखी गई थी. योगी को फ्री हैंड नहीं मिलना, हाथरस में योगी का बुलडोज़र रूकना, पार्टी में कई नेताओं का मीटिंग से गायब होना, अनुप्रिया पटेल जैसी सहयोगियों का योगी को आंख दिखाना. क्या सच में योगी की कुर्सी पर कोई ख़तरा है? क्या सच में योगी को अपनों ने ही चारों तरफ से घेर लिया है?
हाथरस में इतनी बड़ी घटना हुई लेकिन बीजेपी सरकार कोई ख़ास एक्शन नहीं ले पाई?
क्या योगी की नींद उड़ी है? वो जनता को बुलडोज़र के इकबाल पर क्या जवाब दे पाएंगे?
योगी ने सभी अधिकारियों से साफ कहा था दोषी को नहीं छोड़ेंगे, फिर सूरपाल कैसे बचा?
क्या योगी ने एक्शन लेना शुरू किया था उसके पहले ही उन्हें किसी ने कहा रूक जाओ ?
आम तौर पर योगी से बगावत की ख़बर आते ही नाम केशव प्रसाद मौर्य का आता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. केशव प्रसाद मौर्य तो चुनावी नतीजों के बाद से लंबे वक्त से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं...इस बार लखनऊ में ही एक खेल चल रहा है. ये खेल कई महीने से चल रहा है. हाथरस कांड के बाद अखिलेश यादव का एक बयान आया है जिसमें वो एक नेता का नाम लेते हैं. पत्रकार ने सवाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर पूछा लेकिन अखिलेश यादव ने पोल बीजेपी की खोल दी है. अखिलेश खुद सीएम रह चुके हैं. आज भी यूपी के अधिकारी नेता सब उनके संपर्क में रहते हैं अगर वो ये बात कहते हैं तो ज़रूर इसमें कोई गहराई होगी.
BJP में योगी की कुर्सी कौन लेना चाहता है?
तो क्या सच में बृजेश पाठक का नाम योगी की कुर्सी पर चल रहा है? या पाठक जी योगी की कुर्सी की तरफ देख रहे हैं. बीजेपी में एक तूफान हमेशा रहता है. कोई एक हमेशा बीजेपी में होता है, जिसकी चर्चा योगी की कुर्सी पर होती रहती ह. कभी केशव तो कभी बृजेश पाठक, तो कभी AK शर्मा का नाम आता है? क्या बीजेपी में दोनों डिप्टी सीएम और सीएम योगी के बीच सबकुछ ठीक नहीं है, इसका चौंका देने वाला खुसाला एक अधिकारी भी करते हैं, हालांकि हम आपको उनका नाम नहीं बता सकते हैं.
दोनों डिप्टी सीएम और सीएम के बीच कुछ ऐसा व्यवहार है कि दोनों डिप्टी सीएम किसी व्यक्ति की मुलाकात योगी से नहीं करवा सकते हैं. ना ही उनके विभाग की एक फाइल योगी के आदेश के बिना जाती है. ट्रांसफर पोस्टिंग से लेकर हर काम में योगी का आदेश चलता है. इस बात की शिकायत दिल्ली तक होती रहती है! लेकिन योगी का दावा होता है कि हम UP को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं.
क्या यूपी बीजेपी में फूट पड़ गई है?
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी बताया बीजेपी की फूट क्या योगी की कुर्सी को खा जाएगी? ऐसा इसलिए क्योंकि कैबिनेट की मीटिंग से तीन बार केशव प्रसाद मौर्य का गायब होना. एक मीटिंग में बृजेश पाठक का ना दिखना क्या कहता है? क्या चल रहा है? इस बात को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा. एक वक्त था जब बीजेपी पर आरोप लगे थे कि पार्टी ब्राह्मण विरोधी हो गई है. उस वक्त बीजेपी ने दिनेश शर्मा की जगह ब्राह्मण बृजेश पाठक को डिप्टी सीएम बना दिया. कहा गया कि उन्हें दिल्ली से काम करने का मौका मिला है.
शुरूआत में उन्होंने अस्पतालों में छापेमारी भी की, सबकुछ किया, जनता भी खुश थी, लेकिन अचानक बीजेपी में उनका कद बढ़ गया. जो काम पार्टी अध्यक्ष का होता है वो काम उनको मिल गया, और बृजेश पाठक कई नेताओं को दूसरी पार्टी से लाकर बीजेपी में शामिल करवाने लगे. जिसके बाद ये इशारा मिलने लगा था कि क्या उनका कद बढ़ गया है. अखिलेश यादव का बयान आना, सत्ता में बैठे योगी की नींद उड़ा सकता है. अखिलेश यहां तक दावा करते हैं कि योगी को भी पता है कि बृजेश पाठक उनकी कुर्सी लेना चाहते हैं.
हाथरस कांड पर नहीं दिखा एक्शन!
हाथरस कांड के बाद भी योगी का वो एक्शन ना दिखना जो दिखना चाहिए. चुनावी हार के बाद उतरा मायूस चेहरा! काम करने का स्टाइल बदल जाना! लगातार मीटिंग पर मीटिंग करना. उपचुनाव सिर पर होने के बाद भी पार्टी में घमासान होना. क्या इशारा है कि बीजेपी में सबकुछ ठीक नहीं है. इसकी वजह क्या हो सकती है? या अखिलेश यादव विरोधी होने का फायदा उठा रहे हैं, ताकि बीजेपी में तूफान लाया जा सके.
अखिलेश यादव और केजरीवाल के बयान को यूं ही हल्के में नहीं लिया जा सकता है. क्योंकि कई किताब, कई पत्रकार और PMO से जुड़े कई सूत्र बार बार दावा करते हैं कि बीजेपी में योगी को लेकर सबकुछ ठीक नहीं रहता है. यूपी में लोकसभा की करारी हार के बाद बीजेपी को लेकर दो तरह की ख़बरें चली. पहली ये कि योगी के लोगों को टिकट नहीं दिया गया. दूसरी ये कि योगी को दरकिनार करके टिकट बांटा गया जिसका खामियाज़ा बीजेपी को भुगतना पड़ा.
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