उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक साल का वक्त बाकी है, लेकिन उससे पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट ने यूपी के 19 चर्चित बाहुबलियों और प्रभावशाली लोगों का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है। इसमें उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे, शस्त्र लाइसेंस, सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन तक की जानकारी मांगी गई है।
इन नामों में बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह, अब्बास अंसारी, खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें आखिर किस आधार पर सुरक्षा दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी जानना चाहा कि लाइसेंसी हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन क्यों हो रहा है और पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों के बढ़ते प्रदर्शन पर क्या कार्रवाई की।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि जिन लोगों के पास सुरक्षा और हथियार दोनों हैं, क्या उससे कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होती।
रिपोर्ट्स के मुताबिक संतकबीरनगर निवासी जयशंकर नाम के व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। साथ ही आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस विनोद दिवाकर की अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस समय प्रदेश में 10 लाख 8 हजार 893 लाइसेंसधारी मौजूद हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद अदालत ने गंभीर चिंता जताई और विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली।
अब हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि जिन 19 चर्चित नामों की सूची मांगी गई है:
अगर जांच में नियमों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो कई लोगों के लाइसेंस रद्द होने या सुरक्षा घटाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। हाईकोर्ट का रुख फिलहाल कानून व्यवस्था और गन कल्चर को लेकर काफी सख्त दिखाई दे रहा है।
प्रदेश की राजनीति में इन बाहुबलियों का प्रभाव लंबे समय से रहा है। कई नाम चुनाव जीत चुके हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी मानी जाती है। लेकिन अदालत ने साफ संकेत दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।