कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में स्थित 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद, जिसे बांकरा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, को हटाने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर गतिविधियां बढ़ गई हैं. हाल ही में जिला प्रशासन और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अधिकारियों ने मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया, जिसके बाद उत्तर 24 परगना जिलाधिकारी कार्यालय में मस्जिद प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई.
बैठक में एयरपोर्ट अधिकारियों ने मस्जिद को हटाने की जरूरत बताते हुए सुरक्षा, विमान संचालन और आपात स्थिति में संभावित खतरे का हवाला दिया. अधिकारियों के अनुसार मस्जिद सेकेंडरी रनवे से लगभग 165 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि नियमों के मुताबिक किसी भी स्थायी निर्माण को रनवे से कम से कम 240 मीटर दूर होना चाहिए. एयरपोर्ट की सीमा दीवार के भीतर स्थित इस ढांचे को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है.
मस्जिद प्रतिनिधियों का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक सदिकुल्लाह चौधरी ने कहा कि इस विषय पर अंतिम फैसला लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने प्रशासन को दारुल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा ए हिंदा जैसे संगठनों से बातचीत करने की सलाह दी है.
पिछले तीन दशकों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय कई बार मस्जिद को हटाने का प्रयास कर चुका है, लेकिन ज्योतिबा बसु और ममता की सरकारों के दौरान मामला आगे नहीं बढ़ पाया, अब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन समाधान की उम्मीद जता रहा है.