कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों हलचल तेज है. तृणमूल कांग्रेस यानी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी असंतोष की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कई विधायक और कुछ सांसद नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं. सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि करीब 35 विधायकों से पार्टी का सीधा संपर्क कमजोर पड़ा है, जबकि कुछ सांसदों के फोन बंद मिलने की चर्चा ने अटकलों को और हवा दे दी है. हालांकि, पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े टूट या बगावत की पुष्टि नहीं की गई है.
हालिया घटनाओं ने इन कयासों को और मजबूत किया है. बंगाल में चुनाव बाद बढ़ती जांच एजेंसियों की सक्रियता, कई नेताओं पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई, स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल और टिकट वितरण को लेकर असंतोष लगातार सामने आता रहा है. कई पुराने नेताओं को खुद को किनारे किए जाने का एहसास है. दूसरी ओर, विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि सत्ताधारी दल के भीतर बड़ी टूट की तैयारी चल रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर असंतुष्ट विधायक और सांसद एक मंच पर आते हैं तो बंगाल में एक नई क्षेत्रीय पार्टी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि यह भी सच है कि बंगाल की राजनीति में कई बार बगावत की खबरें सामने आईं लेकिन अंतिम समय में नेतृत्व ने स्थिति संभाल ली. ऐसे में फिलहाल यह पूरा मामला कयासों और राजनीतिक संकेतों तक सीमित माना जा रहा है.
बीजेपी और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार हमला बोल रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी के करीबी नेता दावा कर रहे हैं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विरोधियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ राजनीतिक दबाव की रणनीति है या बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की आहट.