इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. सरकार ने पंजाब गृह विभाग की सिफारिश पर रावलपिंडी में अगले छह महीनों के लिए सेना तैनात करने को मंजूरी दे दी है. यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और किसी भी संभावित अप्रिय घटना से निपटने के लिए लिया गया है.
गृह एवं मादक द्रव्य नियंत्रण मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों को रावलपिंडी में “संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों” के लिए तैनात किया गया है. किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन की मदद के लिए सेना वहां रहेगी.
क्यों पड़ी सेना की जरूरत?
यह कदम हाल ही में रावलपिंडी में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद उठाया गया है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से कथित रूप से जुड़े एक व्यक्ति ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी. जवाबी कार्रवाई में हमलावर मारा गया.
सरकारी चैनल पीटीवी न्यूज ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि मृतक हमलावर खैबर जिले का निवासी और पीटीआई का सक्रिय कार्यकर्ता था. उसके पास से पार्टी का झंडा, हथियार और गोलियां बरामद हुईं.
पीटीआई ने किया इनकार
हालांकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने इस घटना से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है. पार्टी का कहना है कि उनका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है और सरकार जानबूझकर उन्हें इस हमले से जोड़ने की कोशिश कर रही है.
रावलपिंडी का रणनीतिक महत्व
रावलपिंडी में सेना की तैनाती इसलिए भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि यहीं पर पाकिस्तान सेना का मुख्यालय (GHQ) स्थित है. यह शहर देश का सबसे प्रमुख सैन्य और प्रशासनिक केंद्र है. ऐसे में यहां सुरक्षा बढ़ाए जाने से बड़े संकट की आशंका जताई जा रही है. पाकिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा हालात पहले से तनावपूर्ण चल रहे हैं. इस ताजा कदम से हालात और ज्यादा गरमा सकते हैं.